शिमला। चीन सीमा के साथ हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और वहां आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में 166 करोड़ रुपये की 70 परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत मंजूरी दी गई। अब इन परियोजनाओं का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं में सड़क संपर्क सुधारने के साथ-साथ आधारभूत ढांचे के विकास और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क, सुविधाओं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से स्थानीय आबादी को गांवों में ही बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
बैठक में संबंधित जिलों के उपायुक्तों और विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर प्रस्तावित परियोजनाओं की जानकारी दी। कमेटी ने परियोजनाओं की प्राथमिकता और उपयोगिता पर विचार करने के बाद इन्हें मंजूरी प्रदान की।
राज्य सरकार का फोकस ऐसे सीमावर्ती गांवों में विकास को गति देने पर है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित कनेक्टिविटी के कारण आधारभूत सुविधाओं का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ होगा।
क्या है वाइब्रेंट विलेज योजना
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम केंद्र सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य चीन की सीमाओं से लगे गांवों का समग्र विकास करना है। योजना में सीमावर्ती गांवों में सड़क और अन्य कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, पर्यटन, आजीविका के अवसर और जरूरी सामाजिक आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।
इसका एक अहम उद्देश्य सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकना और वहां की आबादी को गांवों में ही बेहतर सुविधाएं एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए यह योजना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी और मजबूत आधारभूत ढांचा सीमावर्ती क्षेत्रों को अधिक सक्षम बनाता है।
