शिमला: हिमाचल प्रदेश में सीमैंट के दामों में हुई ताजा बढ़ौतरी को लेकर भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं ऊना से विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के रूप में सीमैंट के दामों पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली कांग्रेस ने सत्ता संभालते ही जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया है और अपने अब तक के कार्यकाल में 5वीं बार सीमैंट महंगा कर दिया है। सत्ती ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य और विडंबना की बात है कि जिस हिमाचल प्रदेश में चूना पत्थर की खदानें हैं और जहां खुद सीमैंट बनता है, वहां के लोगों को ही पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगे दामों पर सीमैंट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में हिमाचल की तुलना में सीमैंट सस्ता मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आपदा और आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता पर लगातार पांचवीं बार सीमैंट के दाम बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी के अपना घर बनाने के सपने पर पानी फेरने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सीमैंट के खुदरा दामों और राज्य सरकार द्वारा लगाए गए करों में मुख्य मौकों पर बढ़ौतरी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि सितम्बर 2023 में राज्य सरकार ने आबकारी व कर विभाग के जरिए कैरिज ऑफ सर्टेन गुड्स बाय रोड टैक्स 7.50 रुपए से बढ़ाकर 11.50 रुपए प्रति बोरी कर दिया, जिससे सीमैंट प्रति बैग 3 से 4 रुपए महंगा हो गया। जनवरी/फरवरी 2024 में सीमैंट निर्माता कंपनियों द्वारा उत्पादन व परिवहन लागत का हवाला देते हुए प्रति बोरी 10 से 15 रुपए तक की सीधी बढ़ौतरी की गई।
जुलाई 2024 में कंपनियों द्वारा प्रदेश भर में आपूर्ति और मालभाड़े के पुनर्मूल्यांकन के नाम पर सीमैंट के दाम 5 से 10 रुपए प्रति बैग बढ़ा दिए गए। सितम्बर 2025 में केंद्र द्वारा राहत मिलने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने सीजीसीआर टैक्स को 11 रुपए से बढ़ाकर 16 रुपए प्रति बोरी कर दिया, जिससे सीमैंट के दामों में फिर से 5 से 6 रुपए प्रति बैग का उछाल आया। हालिया बढ़ौतरी यानी सितम्बर 2026 में कंपनियों द्वारा हाल ही में प्रति बोरी 10 रुपए तक की ताजा वृद्धि की गई है, जिसके चलते एसीसी, अल्ट्राटेक और बांगड़ जैसी प्रमुख कंपनियों के सीमैंट बैग के दाम शिमला और अन्य जिलों में 400 से 480 रुपए तक पहुंच गए हैं।
