नई दिल्ली। गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के हस्ताक्षर के साथ ही किशाऊ परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना से जहां दिल्ली में जमुना को पानी मिलेगा, वहीं 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिचाईं भी होगी और 148 करोड़ यूनिट पनबिजली का उत्पादन भी होगा।
समझौते पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्ताक्षर किये।
अमित शाह ने इसे “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” और टीम भारत के मूल मंत्र का उत्तम उदाहरण बताया। छह राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत कुशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित टोंस नदी पर 233 मीटर ऊंचा कंक्रीट का ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा।
इस डैम में 156 करोड़ घन मीटर पानी का संग्रहण होगा। जिसका इस्तेमाल सिंचाई, पन बिजली के उत्पादन से लेकर यमुना में पर्याप्त पानी का प्रवाह बनाने के लिए भी किया जा सकेगा। अमित शाह ने यमुना जल बंटवारे में एक बड़ी त्रुटि की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसके तहत यमुना का सारा पानी राज्यों में बांट दिया गया और नदी के लिए कुछ नहीं छोड़ा गया।
अब किशाऊ परियोजना समझौते से 25 फीसद पानी यमुना में आएगा, जो दिल्ली और यमुना दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और इससे पर्यावरण का भी संरक्षण होगा। दशकों से लंबित इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल का आभार जताते हुए कहा कि इससे समझौते में सभी राज्य लाभांवित होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के “संवाद से समाधान” के मंत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2018 से 2026 तक का कालखंड मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर भारत में आपसी सहमति से जल विवादों को समाप्त करने के कालखंड के रूप में जाना जाएगा।उनके अनुसार मोदी सरकार में यह दसवां जल विवाद समाप्त होने जा रहा है।
परियोजना के खर्च का 90 फीसद वित्तीय भार केंद्र द्वारा और शेष राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। कुशाऊ परियोजना की परिकल्पना 1994 में की गई थी। लेकिन राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह आगे नहीं बढ़ पाई। गृह मंत्रालय के अनुसार उत्तराखंड को कुछ कठिनाइयां थी।
लेकिन केंद्र की ओर से उत्तराखंड को आश्वस्त किया गया कि अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत उनकी मांगों को समाहित करने का प्रयास किया जाएगा और उसपर आने वाले वित्तीय भार के वहन में भी केंद्र सरकार मदद करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 की बैठक में किशाऊ परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा केंद्रीय मंत्रिगणों, सहभागी राज्य सरकारों एवं उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
