शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई नेता विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डा. हंसराज, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल, रीना कश्यप, पवन काजल प्रमुख हैं।
ये वे लोग हैं जिनके नेतृत्व का गुण ग्रामीण संसद से ही परखा गया और परवान चढ़ा। राजनीति के पहले सबक को समझते हुए ये नेता लंबे समय से राजनीतिक पारी में बने हुए हैं। इन नेताओं की सफलता दर्शाती है कि स्थानीय निकाय में जीत हासिल करने के बाद विधानसभा में भी उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण है। वर्तमान में हिमाचल में शहरी निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है, जबकि पंचायत चुनाव की घोषणा अगले सप्ताह तक होने की संभावना है।
पार्षद से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू शिमला नगर निगम के छोटा शिमला वार्ड से दो बार पार्षद रहे हैं। छात्र जीवन से ही वह एनएसयूआइ से जुड़े। नगर निगम का चुनाव लड़ने के बाद नादौन से विधानसभा का टिकट मिला और विधायक बने। चार बार विधानसभा चुनाव जीते सुक्खू अब मुख्यमंत्री हैं।
शांता कुमार का पंच से मुख्यमंत्री तक का सफर
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1963 में गढजमूला पंचायत के पंच के रूप में की थी। इसके बाद वह भवारना पंचायत समिति के सदस्य बने। 1965-1970 तक कांगड़ा जिला परिषद के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वह विधानसभा पहुंचे और दो बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। वह दोनों सदनों के सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री भी रहे।
अनिरुद्ध रहे हैं शिमला जिला परिषद अध्यक्ष
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने राजनीतिक यात्रा की शुरुआत मशोबरा के जिला परिषद वार्ड से की। उन्होंने दो बार जिला परिषद का चुनाव जीता और जिला परिषद के अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्हें कसुम्पटी वार्ड से विधानसभा चुनाव का टिकट मिला, जिसमें सफलता प्राप्त की।
आइडी लखनपाल रहे शिमला में निगम पार्षद
भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल शिमला नगर निगम के पार्षद रह चुके हैं। उन्होंने कच्ची घाटी वार्ड से जीत हासिल की और कांग्रेस ने उन्हें बड़सर विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारा, जहां उन्होंने जीत दर्ज की। वीरभद्र सरकार में वह सीपीएस बने और बाद में भाजपा में शामिल होकर उपचुनाव में जीत हासिल की।
कंवर ने जीता था पंचायत उपप्रधान चुनाव
पूर्व पंचायती राज एवं पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने पंचायत उपप्रधान के रूप में राजनीति की शुरुआत की। उन्होंने पहले पंचायत प्रधान का चुनाव जीता और फिर भाजपा के संपर्क में आकर कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने सफलता प्राप्त की।
किशोरी पांच बार रहे प्रधान और उपप्रधान
बैजनाथ से वर्तमान कांग्रेस विधायक किशोरी लाल ने बैजनाथ पंचायत में प्रधान और उपप्रधान के रूप में पांच बार कार्य किया। वह 2012 में बैजनाथ से विधायक चुने गए।
डा. बिंदल व रामकुमार रहे नगर परिषद के अध्यक्ष, अवस्थी पार्षद
- भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री डा. राजीव बिंदल ने भी नगर परिषद का चुनाव जीतकर राजनीतिक यात्रा शुरू की। उन्होंने सोलन नगर परिषद (अब नगर निगम) के पार्षद का चुनाव जीता और अध्यक्ष भी रहे। भाजपा ने उन्हें सोलन विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने जीत दर्ज की। सोलन सीट आरक्षित होने के बाद उन्होंने नाहन से चुनाव लड़ा व जीत हासिल की। पिछले विधानसभा चुनाव में वह हार गए थे।
- सोलन जिला के दून विधानसभा क्षेत्र के विधायक राम कुमार चौधरी भी सोलन जिला परिषद अध्यक्ष रह चुके।
- अर्की के विधायक संजय अवस्थी नगर परिषद सोलन के पार्षद रह चुके।
हंसराज, काजल, अवस्थी, लोकेंद्र, रीना, अनुराधा व चैतन्य भी रहे जिला पार्षद
- चुराह से विधायक डा. हंसराज विधायक बनने से पूर्व जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। वह वर्ष 2010 में तत्कालीन भंजराड़ू वार्ड (वर्तमान सनवाल) से जिला परिषद सदस्य रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2012 से अब तक लगातार चुराह के विधायक हैं।
- कांगड़ा से भाजपा विधायक पवन काजल का राजनीतिक सफर जिला परिषद के सदस्य के रूप में शुरू हुआ। वह कांगड़ा के खोली वार्ड से दो बार जिला परिषद सदस्य रहे। वर्ष 2012 में निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और फिर विधायक बने। 2022 में भाजपा के टिकट पर तीसरी बार विधायक चुने गए।
- आनी से विधायक लोकेंद्र कुमार भी जिला परिषद का चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए और विधानसभा का चुनाव जीता।
- विधायक रीना कश्यप भी जिला परिषद के नेरी कोटली वार्ड से जीती थी। उन्हें विधानसभा उपचुनाव में पार्टी ने मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की। वह दूसरी बार निर्वाचित हुई हैं।
- अनुराधा राणा कांग्रेस की विधायक हैं। लाहुल स्पीति सीट पर उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल की है। इससे पहले वह जिला परिषद सदस्य थीं।
- गगरेट विधानसभा क्षेत्र के भंजाल वार्ड से चैतन्य शर्मा वर्ष 2021 में जिला परिषद सदस्य व 2022 में विधायक बने।
ये भी पहुंचे विधानसभा
- कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र से देवेंद्र कुमार भुट्टो बंगाणा में वर्ष 2000 में पंचायत समिति सदस्य व 2022 में विधायक बने।
- कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र से रामदास मलांगड़ 1970 में धुंधला पंचायत से सदस्य व 1993 में विधायक बने।
- चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से गणेशदत्त भरवाल 1982 में पंचायत सदस्य व 1985 में विधायक बने।
- बिलासपुर से सुभाष ठाकुर वर्ष 2000 में जिला परिषद सदस्य चुने गए।उसके बाद 2017 में बिधायक बने।
- बंबर ठाकुर वर्ष 2006 में जिला परिषद सदस्य चुने और 2012-17 तक बिलासपुर सदर के विधायक रहे।
