पंजाब में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अखिल भारतीय छठे आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि राज्य में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में लाखों छोटे-बड़े प्रतिष्ठान आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि पारंपरिक नौकरियों के साथ-साथ स्वरोजगार और घरेलू व्यवसायों की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
सर्वे के मुताबिक पंजाब में कुल 36.46 लाख प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, जिनमें से 23.63 लाख प्रतिष्ठानों में एक या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 3.05 लाख प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं, जिनमें 1.27 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों में अतिरिक्त कर्मचारियों को रोजगार दिया जा रहा है। हालांकि बड़े उद्योगों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है और केवल 2.69 प्रतिशत प्रतिष्ठानों में ही 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके बावजूद छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र भी रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राज्य में 3.64 लाख से अधिक खुदरा व्यापार इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 91 हजार प्रतिष्ठानों में अतिरिक्त कर्मचारियों को रोजगार मिला हुआ है। वहीं आवास और खाद्य सेवा क्षेत्र में 56 हजार से अधिक प्रतिष्ठान सक्रिय हैं। इनमें बड़ी संख्या में पेइंग गेस्ट, होम स्टे, टिफिन सर्विस और छोटे खानपान व्यवसाय शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में पीजी और टिफिन सेवाओं का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे युवाओं और महिलाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा हुए हैं।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र भी पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। राज्य में 2.61 लाख से अधिक पशुपालन प्रतिष्ठान कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 49 हजार प्रतिष्ठान अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं।
शिक्षा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। प्रदेश में 44 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थान और प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं, जिनमें 36 हजार से अधिक संस्थानों में अतिरिक्त कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों की बढ़ती मांग के कारण कोचिंग संस्थानों और निजी प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
निर्माण क्षेत्र, मोटर वाहन मरम्मत, जल प्रबंधन, बिजली आपूर्ति, कला और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में भी हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। निर्माण क्षेत्र के 31 हजार से अधिक प्रतिष्ठान रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि मोटर वाहन और मोटरसाइकिल मरम्मत से जुड़े 47 हजार से अधिक प्रतिष्ठानों में बड़ी संख्या में लोग कार्यरत हैं। सर्वे से स्पष्ट होता है कि पंजाब की अर्थव्यवस्था में छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार और सेवा क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाए, तो रोजगार के अवसरों में और वृद्धि हो सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि पंजाब में स्वरोजगार आधारित मॉडल और छोटे कारोबार आने वाले समय में रोजगार सृजन की रीढ़ साबित हो सकते हैं।
