सितारगंज। नहरों के किनारे बसे परिवारों को सिंचाई विभाग सितारगंज के उपखण्डों के सहायक अभियंताओं की ओर से सिंचाई विभाग की भूमि खाली करने के लिए नोटिस जारी किये गए हैं। इन नोटिसों की संख्या करीब 1500 सौ बतायी जा रही है। सिंचाई उपखण्ड प्रथम से करीब 500 नोटिस जारी हुए हैं। वार्ड संख्या 06 के कई घरों में सिंचाई विभाग द्वारा लाल निशान भी लगाये गये है। जिससे वहां बसे परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जाता है कि सिंचाई खण्ड की ओर से जारी नोटिसों में विभागीय भूमि पर अतिक्रमण के सम्बंध में उच्च न्यायालय नैनीताल की याचिका के क्रम में सिंचाई विभाग की सरकारी भूमि पर रह रहे मकान, दुकान, स्थायी,अस्थायी अतिक्रमण का हवाला दिया गया है। नोटिस में अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाने पर बलपूर्वक हटाने की कार्यवाही की चेतावनी दी गयी है। सिंचाई खण्ड के ईई एएस नेगी ने बताया कि उपखण्डों से सिंचाई खण्ड की अतिक्रमण की गयी जमीनों को खाली करने के नोटिस दिये गये हैं।इधर दशकों से भूमि में बसे लोगों द्वारा मालिकाना हक दिये जाने की मांग को लेकर सोमवार को उप जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। वार्ड छह सहित आसपास के वार्डों में बसे लोगों ने दिये ज्ञापन में कहा है कि सिंचाई खण्ड की ओर से नोटिस देकर मकान हटाने के नोटिस दिये हैं और बलपूर्वक हटाने की चेतावनी दी है। सभी परिवार दशकों से पक्के, कच्चे आवास बनाकर रह रहे हैं। उनके घरों में बिजली मीटर लगे हैं। पानी लाइनें है। नगरपालिका में टैक्स अदा करते हैं। हटाए जाने पर वे बेघर हो जायेंगे। ज्ञापन में वर्षो से रह रहे परिवारों को मालिकाना हक देने की मांग की गयी है।राजेश बाल्मीकि के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपने वालों में नारायण सिंह, प्रेमवती, राजेश, सूरजपाल, नवीजान, इदरीश, राजेश, रमेश, तनवीर, जाकिर, मोहन लाल, चन्द्रपाल, अबरार आदि मौजूद थे। उधर पूर्व पालिकाध्यक्ष एड• हरीश दुबे ने कहा है कि उच्च न्यायालय के जिस रिट याचिका का हवाला देते हुए नोटिस दिये जा रहे हैं। उस रिट में इन परिवारों का कहीं भी खुलासा नहीं किया गया है। मनमानी तरीके से 50 वर्षों से अधिक परिवारों को उजाड़ने का षडयंत्र किया जा रहा है। जिसका सड़क में विरोध किया जायेगा। न्यायालय में विभाग के विरुद्ध विधिक लड़ाई लड़ी जायेगी।
