देहरादून। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह बुधवार को धूमधाम और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। समारोह में 37 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए, जबकि 14 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, राज्यपाल उत्तराखण्ड एवं कुलाधिपति रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. धन सिंह रावत तथा तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में 124 सीटों वाले महिला छात्रावास और टाइप-3 आवास के लोकार्पण से हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय सभागार में दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और कुलगीत के साथ दीक्षांत समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि नवंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच 14 शोधार्थियों ने पीएचडी पूर्ण की है। सत्र 2024-25 में कुल 5,127 विद्यार्थियों को विभिन्न स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं।
उन्होंने बताया कि बीटेक ओवरऑल टॉपर सुश्री गुंजन भटनागर, तुलाज इंस्टीट्यूट देहरादून को श्रीमती विनोद देवी अग्रवाल मेमोरियल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 26,115 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और शोधार्थियों द्वारा 37 पेटेंट पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 25 प्रकाशित हो चुके हैं।
दीक्षांत समारोह में एआई लिटरेसी मिशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब, EVORA APP और सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम की जानकारी साझा की गई। साथ ही IIT रुड़की, IIT रोपड़ और जर्मनी के संस्थानों के साथ हुए एमओयू का उल्लेख किया गया।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को “नौकरी खोजने वाला” नहीं बल्कि “नौकरी देने वाला” बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला रहा है और विकसित भारत के निर्माण में उसकी बड़ी भूमिका होगी।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विश्वविद्यालय में 350 नियमित पदों पर शीघ्र भर्ती और 16 करोड़ रुपये की निधि स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से एक आंगनबाड़ी और एक प्राथमिक विद्यालय गोद लेने की अपील भी की।
समारोह में उत्तराखण्ड के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विश्वविद्यालय की कार्य परिषद, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अभिभावक उपस्थित रहे।
