पंजाब में महिलाओं का लंबा इंतजार आखिर आज खत्म हो गया। भगवंत मान सरकार ने बुधवार (1 जुलाई) से ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत करते हुए 18 साल से ऊपर की महिलाओं के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए. यह पहली रकम है, जो इस योजना के तहत सरकार द्वारा महिलाओं को दी गई. इस योजना की शुरुवात CM भगवंत मान ने धूरी के गांव लड्डा से की. जहां इस कार्यक्रम के दौरान पंजाब आम आदमी पार्टी प्रभारी मनीष सिसोदिया और आप प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा भी मौजूद रहे. वहीं साथ ही कई लाभार्थी महिलाओं की भी मौके पर उपस्थिति रही.
महिलाओं के खातों में 3 महीने के पैसे इकट्ठे आए
पंजाब में ‘मुख्यमंत्री मांवां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत भगवंत मान सरकार द्वारा 18 साल से ऊपर जनरल वर्ग की सभी पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है. वहीं अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह राशि सीधे महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है. 1 जुलाई को योजना की शुरुवात होते ही महिलाओं के खातों में 3 महीने के पैसे इकट्ठे भेजे गए हैं. जिसमें दलित वर्ग की महिलाओं के मोबाइल में 4500-4500 रुपये आने के मैसेज आए. जबकि जनरल वर्ग की महिलाओं को 3 महीने के हिसाब से 3000-3000 रुपये मिले.
CM मान के सामने महिलाओं के मोबाइल में मैसेज बजे
सीएम भगवंत मान जब मंच से संबोधित कर रहे थे तो इसी बीच उनके सामने मौजूद महिलाओं के मोबाइल में पैसे ट्रांसफर होने के मैसेज बजे. जिसके बाद सीएम मान ने सभी महिलाओं को बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं को मंच पर आने को भी कहा. सीएम के कहने पर कुछ महिलाएं मंच पर पहुंची और आभार व्यक्त किया. वहीं सीएम मान ने महिलाओं से कहा कि जुलाई, अगस्त और सितंबर, 3 महीने के इकट्ठे पैसे आ रहे हैं. आज से पैसे आने शुरू हुए हैं और बैंक से ट्रांसफर होने का प्रोसेस के हिसाब से धीरे-धीरे सभी लाभार्थी महिलाओं के खातों में पैसे आते आ जाएंगे. सीएम मान ने जानकारी दी कि इस योजना में 30 जून तक 40 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए हैं.
बंद नहीं की जाएगी ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’
योजना की शुरुवात करते हुए सीएम भगवंत मान ने यह भी एलान किया ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ बंद नहीं की जायेगी और न वापस ली जायेगी. उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए चाहें जहां से पैसे लाने पड़े लेकिन ये योजना जारी रहेगी. सीएम ने कहा कि विपक्ष सवाल उठाता है कि इतने पैसों में महिलाओं का क्या ही होगा लेकिन विपक्ष के लोग ये नहीं जानते की गरीबी में इतने पैसे ही बहुत होते हैं. मान ने कहा कि मैंने गरीबी को निकट से देखा है और मुझे पता है कि लोग किस तरह से रोज का गुजारा करते हैं.
केजरीवाल बोले- आज पंजाब के लिए बहुत बड़ा दिन
पंजाब में ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत होने पर आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने इसके लिए बधाई दी है. केजरीवाल ने लिखा ”आज पंजाब के लिए बहुत बड़ा दिन है। पंजाब की माताओं और बहनों के लिए बहुत बड़ा दिन है। अब तक सबने पंजाब को लूटा। भगवंत मान पहला CM है जिसने पंजाब को नहीं लूटा। सारा सरकारी पैसा लोगों तक पहुंचाया। पंजाब को लूटने वाले आज माताओं और बहनों को गालियाँ दे रहे हैं, भगवंत मान को गालियां दे रहे हैं। पर वो समझ लें, अब पंजाब बदल चुका है। अब पंजाब तेज़ी से विकास की राह पर चल रहा है। सभी पंजाबियों को बहुत बहुत मुबारकबाद।”
AAP का प्रमुख चुनावी वादा हुआ पूरा
ज्ञात रहे कि यह AAP का प्रमुख चुनावी वादा था, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में किया गया था। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के लगभग चार साल से ज्यादा समय तक महिलाएं इस वादे के पूरा होना का इंतजार करती रहीं। दरअसल विधानसभा चुनाव 2022 से पहले आम आदमी पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल ने खुद पंजाब की महिलाओं से वादा किया था की आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर राज्य में 18 साल से ऊपर हर महिला को 1000 रुपये हर महीने मिलेंगे। अगर एक परिवार में एक बेटी है, एक बहू है, एक सास है तो तीनों के अकाउंट में 1-1 हजार रुपए आएंगे। केजरीवाल ने कहा था की इस कदम से महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्तिकरण होगा। अगर उनके पास पैसे होंगे तो वो अपने मन का कुछ कर पाएंगी।
कौन सी महिलाएं इस योजना से बाहर
बता दें कि पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ के दायरे से कुछ महिलाओं को बाहर भी रखा है। जो इस योजना की लाभार्थी नहीं बन सकेंगी। मौजूदा या पूर्व व अस्थायी सरकारी कर्मचारी, सांसद, विधायक और इनकम टैक्स भरने वाली महिलाएं इस योजना की पात्र नहीं होंगी। लेकिन वो महिलाएं इसके पात्र होंगी जो मौजूदा समय में अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ ले रहीं हैं। 18 साल से ऊपर की पंजाब की 97% महिलाएं इस योजना के दायरे में आएंगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें घरेलू फैसलों में आगे बढ़ाना है। ये नारी सशक्तिकरण और उनके मान-सम्मान की दिशा में एक अहम कदम है।
