प्रदेश सरकार ने राज्य के जलविद्युत संसाधनों से अधिकतम आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एसजेवीएनएल को पूर्व में आवंटित तीन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को सचिवालय में ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से 382 मेगावाट की सुन्नी, 210 मेगावाट की लुहरी चरण-एक और 66 मेगावाट की धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया तत्काल आरंभ करने को कहा। इन तीनों परियोजनाओं की कुल क्षमता 658 मेगावाट है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से यहां के लोगों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक संसाधनों में हिमाचल के उचित हिस्से को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एनएचपीसी की ओर से विकसित की जा रही 500 मेगावाट डुग्गर जलविद्युत परियोजना की शर्तों और नियमों पर पुनर्विचार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी ने परियोजना में बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिसके चलते परियोजना की प्रकृति और प्रभाव में बदलाव आएगा। ऐसे में राज्य सरकार संशोधित परियोजना के अनुरूप हिमाचल के लिए बेहतर आर्थिक और अन्य लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।
सीएम ने 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले आठ वर्षों से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। सरकार का अनुमान है कि किशाऊ परियोजना से मिलने वाली मुफ्त बिजली के माध्यम से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव ऊर्जा राकेश कंवर, ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति, एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का जनहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाले लाभ को बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हितों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
