सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो यश भारती पुरस्कार की राशि 11 लाख से बढ़ाकर 21 लाख करेंगे। साथ ही हर महीने मिलने वाली सम्मान राशि 50 हजार से एक लाख करने की घोषणा की। रविवार को सपा दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा अध्यक्ष ने कहा कि खेल में कोई खेल नहीं होने देंगे। इस सरकार ने यश भारती सम्मान बंद किया है उसे फिर शुरू किया जाएगा। आपको बता दें योगी सरकार ने साल 2020 में यश भारती के जगह राज्य संस्कृति पुरस्करा की शुरूआत की थी। साथ ही हर महीने मिलने वाली पेंशन बंद कर दी थी। जिस पर खूब सियासी बयानबाजी हुई थी।
1994 में शुरू हुआ था यश भारती सम्मान
यूपी का यश भारती सम्मान प्रदेश सरकार का प्रमुख नागरिक सम्मान रहा है। इसकी शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 1994 में की थी। कुछ स्रोत इसे 1994-95 में शुरू हुआ बताते हैं। कला के क्षेत्र में उन कलाकारों को यश भारती दिया जाता था, जिन्होंने कला, खेल, संस्कृति, अभिनय, चित्रकला, नृत्य, संगीत, लोक कला, रंगमंच आदि में उल्लेखनीय योगदान दिया हो और अपने काम से यूपी का नाम रोशन किया हो।
अखिलेश ने बीजेपी को घेरा
सपा अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैफई पर टिप्पणी करने वालों और मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि गोरखपुर को सैफई से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि आने वाले चुनाव में सपा का मुकाबला किसी पार्टी के बजाय किसी वाहिनी से हो सकता है। 2017 में उन्हें आयोग की साख पर भरोसा था, लेकिन 2022 में लगातार समाजवादी वोटर काटे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने प्राइवेट कंपनियों को लगाकर गांव -गांव फॉर्म-7 भेजे थे, जिन्हें पीडीए के प्रहरियों ने पकड़ा। यूपी में फॉर्म 7 बंद हुआ लेकिन दोषी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अखिलेश ने कहा कि लोगों ने जागरूक होकर 2024 में अपने वोट बनवाए और सपा के सर्वाधिक सांसद जिताए।
चुनाव में बेईमानी के आरोप लगाए
अखिलेश ने उपचुनावों का जिक्र करते हुए भाजपा पर चुनाव में बेईमानी के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं ने सदन में कफन लेकर प्रदर्शन तक किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वाराणसी में जेन-जी से संवाद कार्यक्रम स्थगित होने पर भी अखिलेश ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम होता तो जेन-जी उनसे सवाल-जवाब करती।
