चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य में बिना लाइसेंस संचालित हो रही मांस बिक्री की दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। विशेष रूप से सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाने को कहा गया है, ताकि नियमों के विरुद्ध चल रही दुकानों के विरुद्ध तुरंत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल के अनुसार सरकार के संज्ञान में आया है कि कई स्थानों पर मांस की दुकानें बिना आवश्यक लाइसेंस के संचालित हो रही हैं।
इसके अतिरिक्त कुछ दुकानों का संचालन धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी किया जा रहा है, जिससे स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की शिकायतें मिली हैं। इससे आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विपुल गोयल ने स्पष्ट किया कि ऐसे अवसरों पर ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि हरियाणा नगर पालिका (मांस विक्रय का विनियमन) उपनियम 1976 के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र में मांस का विक्रय करने के लिए संबंधित प्राधिकरण से विधिवत लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है।
साथ ही मांस की बिक्री केवल उन्हीं परिसरों में की जा सकती है, जिन्हें नगर निकाय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप लाइसेंस प्रदान किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध एवं बिना लाइसेंस संचालित दुकानों की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद कराएं।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों के निकट किसी भी प्रकार की मांस बिक्री की अनुमति नहीं मिले।
हरियाणा सरकार के शहरी निकाय विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत आदेश भी जिला मुख्यालयों पर भेज दिया गया है। विपुल गोयल के अनुसार राज्य सरकार नागरिकों की धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
इसलिए सभी नगर निकाय यह सुनिश्चित करें कि मांस विक्रय से संबंधित सभी गतिविधियां निर्धारित नियमों और स्वच्छता मानकों के अनुरूप ही संचालित हो पाएं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि इन निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
कैबिनेट मंत्री ने सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं को निर्देश दिया है कि इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट सात दिनों के भीतर विभाग को भेजी जाए, ताकि राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
