जयपुर : संसदीय समितियों को अधिक प्रभावी और एकरूप बनाने को लेकर गुलाबी नगरी जयपुर में मंथन हुआ. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की दूसरी बैठक मंगलवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता नरेन्द्र सिंह तोमर ने की, जिसमें वासुदेव देवनानी सहित 6 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल हुए. बैठक में समिति प्रणाली को मजबूत बनाने और राज्यों में एकरूपता लाने पर चर्चा हुई, जबकि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष इसमें शामिल नहीं हुए.
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन : बैठक के बाद देवनानी ने बताया कि समिति प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया. विधान मंडलों की समितियां सदन का लघु रूप होती हैं और उनकी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है. इस दिशा में सभी राज्यों की समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने पर विशेष जोर दिया गया. उन्होंने बताया कि बैठक में विधायकों की समितियों में भागीदारी बढ़ाने, समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने, परीक्षण प्रक्रिया को समान बनाने तथा समितियों की रिपोर्ट पर राज्य सरकारों द्वारा समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
इसके अलावा, समितियों की रिपोर्ट पर सदन में व्यापक चर्चा सुनिश्चित करने पर भी विचार किया गया. इससे पहले राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों का पारंपरिक राजस्थानी अंदाज में दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न के रूप में ऊंट की धातु प्रतिकृति भेंट की . इस अवसर पर राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें सारंगी वादन, “पधारो म्हारे देश” की धुन, कच्छी घोड़ी नृत्य और कठपुतली कला ने अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होगी रिपोर्ट : देवनानी ने कहा कि समिति प्रणाली लोकतांत्रिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो न केवल विधायी कार्यों को गहराई से समझने में मदद करती है, बल्कि आमजन के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने का मंच भी प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि समितियां संसदीय शोध को भी सशक्त बनाती हैं और शासन-प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं.
उन्होंने जानकारी दी कि सभी राज्यों की समिति प्रणालियों का अध्ययन लगभग पूरा कर लिया गया है और उन्हें अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है. इस दिशा में समिति द्वारा तैयार की जा रही अनुशंसाओं की रिपोर्ट जून माह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रस्तुत की जाएगी. आवश्यकता हुई तो रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले एक और बैठक आयोजित की जा सकती है. देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संसद और विधानसभाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. ऐसे में उनकी समितियों को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना समय की मांग है.
