अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए मशहूर अलीगढ़ के भाजपा सांसद सतीश गौतम ने एक बार फिर विवादों में हैं। रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान सांसद ने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ मुसलमान ही ले रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “सरकार मकान दे रही है, सिलेंडर दे रही है, मेडिकल सुविधाओं का लाभ भी यही लोग ले रहे हैं, अब क्या ये हमारी छाती पर चढ़ेंगे?”
नमाज और पुष्पवर्षा की मांग पर बरसे सांसद
विवाद की शुरुआत एआईएमआईएम (AIMIM) द्वारा जिला प्रशासन से की गई एक मांग के बाद हुई। एआईएमआईएम ने ईद की नमाज नुमाइश ग्राउंड में कराने और नमाजियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने की अनुमति मांगी थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश गौतम ने कहा, “होली-दिवाली हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार हैं, लोग शांति से मनाते हैं। लेकिन ये लोग ईद पर सड़कों पर एकत्रित होते हैं, इतना अतिक्रमण किया हुआ है। इनकी ईदगाहें इतनी बड़ी हैं, फिर भी वहां से सुबह चार बजे चिल्लाते हैं। बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में नुमाइश ग्राउंड में नमाज की क्या जरूरत है?”
विपक्ष ने घेरा, बताया बांटने की राजनीति
सांसद के इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बसपा नेता सलमान शाहिद ने इसे समाज को बांटने की गहरी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ हमेशा से आपसी सौहार्द और प्यार-मोहब्बत का केंद्र रहा है, लेकिन सांसद जैसे लोग सियासत के लिए जहर घोल रहे हैं।
वहीं, समाजवादी युवजन सभा के महानगर अध्यक्ष आमिर आबिद ने कहा कि अगर मुसलमान सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है, तो वह संविधान के तहत उसका अधिकार है। उन्होंने सांसद पर पलटवार करते हुए कहा, “भाजपा के लोग खुद अपराधों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, लेकिन सांसद उस पर चुप रहते हैं। उन्हें रमजान और ईद की बुनियादी जानकारी तक नहीं है और वह केवल मुस्लिम समाज को नीचा दिखाने का काम कर रहे हैं।” अलीगढ़ में इस बीजेपी सांसद के बयान के बाद राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि त्योहारों के सीजन में कानून-व्यवस्था बनी रहे।
बयानों को लेकर पहले भी विवाद
यह पहली बार नहीं है जब सतीश गौतम ने इस तरह का विवादित बयान दिया है। उनका विवादों से पुराना नाता रहा है। सतीश गौतम तब राष्ट्रीय चर्चा में आए थे जब उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर मोर्चा खोल दिया था। इसके अलावा बिहारी, अधिकारियों को धमकी, जातिगत टिप्पणी को लेकर भी उनके बयान सुर्खियों में रहे थे।
