यूपी कोटे की 10 राज्यसभा सीटें पांच नवंबर को रिक्त हो रही हैं। इनमें से आठ भाजपा और एक-एक सपा और बसपा के पास हैं। चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए निर्वाचन का कार्यक्रम मंगलवार को जारी कर दिया। इस बार होने वाले चुनाव में बसपा का राज्यसभा से भी प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा। समाजवादी पार्टी को लाभ होना तय है। बसपा वाली सीट सपा की झोली में आ रही है। जहां तक सत्ताधारी दल भाजपा का सवाल है तो उसे अपना 8वां प्रत्याशी जिताने के लिए वोटों का अंकगणित अपने पक्ष में मोड़ने के लिए मशक्कत करनी होगी।
यूपी विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाने वाले राज्यसभा सदस्यों का चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही, प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। अक्तूबर में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा और सपा का सीधा मुकाबला होगा। वर्तमान में 403 सदस्यों वाली विधानसभा में छह सीटें खाली हैं। ऐसे में 397 विधायक अपने वोटों का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में एक राज्यसभा की सीट के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी।
एनडीए के पास 294 तो विपक्ष के पास 103 विधायक
रालोद के एनडीए का हिस्सा बन जाने के चलते विपक्षी गठबंधन की सदस्य संख्या घट गई है। विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की कुल सदस्य संख्या 294 है जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन का संख्या बल 103 है। जहां तक एनडीए का सवाल है तो भाजपा के 256, अपना दल (एस) के 13, रालोद के नौ, सुभासपा के छह और निषाद पार्टी के पांच सदस्य हैं। तीन सदस्य मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह असंबद्ध हैं।
दो विधायक राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के हैं। राजा भैया ने पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा के 8वें प्रत्याशी संजय सेठ को जिताने में मदद की थी। इस लिहाज से उनके दल को भी एनडीए का ही सहयोगी माना जा रहा है।
पिछली बार सपा में हुई थी सेंधमारी
इस लिहाज से भाजपा को अपने सात सदस्य जिताने में कोई दिक्कत नहीं होगी जबकि 8वें प्रत्याशी को राज्यसभा पहुंचाने के लिए सियासी गुणा-गणित दुरुस्त करना होगा। उधर, सपा के एक की तुलना में इस बार दो सदस्यों का राज्यसभा पहुंचना तय है लेकिन यदि पार्टी तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो उसके लिए जीत का जरूरी संख्या बल जुटाना होगा।
एनडीए के पास 294 विधायक हैं। बीजेपी सात सीटें तो आसानी से जीत रही है। आठवीं सीट के लिए उसे दो विधायकों की जरूरत होगी। इसी तरह विपक्ष की बात करें तो सपा के 101 और कांग्रेस के दो कुल 103 विधायक हैं। 74 विधायकों के जरिए दो सीटें जीतने के बाद सपा के पास 29 अतिरिक्त विधायक होंगे। सपा इनके बल पर तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो उसे आठ विधायक चाहिए। अगर सपा तीसरा और भाजपा आठवां प्रत्याशी उतारती है तो दूसरी वरीयता का वोट अहम हो जाएगा।
पिछली बार राज्यसभा सीटों के चुनाव में भाजपा ने सपा में सेंधमारी करने में सफलता हासिल कर ली थी। इसी का नतीजा था कि आठवें प्रत्याशी के लिए जरूरी संख्या बल न होने के बावजूद सत्ताधारी दल ने सफलता हासिल कर ली थी।
इन सदस्यों का खत्म हो रहा कार्यकाल
भाजपा से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी व बीएल वर्मा, अरुण सिंह, डा. दिनेश शर्मा, सीमा द्विवेदी, बृजलाल, गीता शाक्य, नीरज शेखर का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसी तरह सपा से प्रो. रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
