कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली पुर्नवासी पर कोर्ट का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। कोर्ट से गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है। एक माह के भीतर आरोपी वैशाली गिरफ्तार या पेश नहीं होती है तो उसके खिलाफ कुर्की की कार्यवाही शुरू होगी। वहीं, शुभम को अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाले विकास सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। विकास सिंह शुभम का ही पड़ोसी है। विकास की पत्नी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
कफ सिरप तस्करी में वाराणसी के कोतवाली थाने में कायस्थ टोला (प्रह्लाद घाट) निवासी सरगना शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद के साथ ही शुभम की पत्नी वैशाली को भी आरोपी बनाया गया है। शुभम ने तस्करी की कमाई से वैशाली के नाम से संपत्ति बनाई। रामकटोरा स्थित मकान वैशाली के नाम से है। वैशाली भी बीते साल नवंबर में ही फरार चल रही है। अब अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-14) की कोर्ट से उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है। कोतवाली इंस्पेक्टर दयाशंकर सिंह ने बताया कि एक माह में गिरफ्तारी नहीं होने पर कुर्की की कार्यवाही के लिए कोर्ट में प्रार्थना-पत्र दिया जाएगा।
विकास ने शुभम को जारी किया था अनुभव प्रमाण पत्र
कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के सरगना और प्रह्लाद घाट (आदमपुर) कायस्थ टोला निवासी भगोड़े शुभम जायसवाल को फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने वाले विकास सिंह को रोहनिया पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। विकास ने अपनी दवा के फर्म से शुभम को दो साल का फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया था।
इंस्पेक्टर रोहनिया राजू सिंह ने बताया कि आरोपी विकास सिंह, शुभम जायसवाल का पड़ोसी है। शुभम जायसवाल की रांची में शैली ट्रेडर्स फर्म थी। वहां का ड्रग विभाग भी जांच कर रहा है। वहां की जांच में पता चला कि शुभम को सिरप सप्लाई का कारोबार करने के लिए विकास सिंह ने ही फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया था जबकि शुभम ने विकास की दुकान पर कभी काम नहीं किया। इस आधार पर रोहनिया पुलिस ने विकास सिंह को गिरफ्तार किया है।
विकास पर कूटरचित दस्तावेज, धोखाधड़ी के अलावा एनडीपीएस एक्ट में भी केस दर्ज है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उप निरीक्षक पवन कुमार, भरत चौधरी, मुकेश पाल, दिनेश कुमार त्रिपाठी, विवेक कुमार यादव, मान्सी देवी, हेड कांस्टेबल चन्द्रभान यादव, रमाशंकर यादव आदि शामिल थे।
‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ की शुरुआत किसने की थी?
बिजली उपकरण कारोबारी विकास ने फर्जी फर्म खोली: विकास सिंह भी शुभम के गिरोह का शातिर सदस्य है। उसने शुभम के साथ तस्करी का पूरा खाका तैयार किया। विकास कभी बिजली के उपकरणों का कारोबारी था। शुभम ने तस्करी संबंधी प्लान तैयार किया तो विकास सिंह ने थ्री-बीएचके फ्लैट का पता दर्शाते हुए अपनी बेटी के नाम से श्यामभवी फर्म खोला।
विकास के फर्म से कभी नहीं हुआ दवा का काम
विकास के श्यामभवी फर्म को खुले दो माह ही हुए थे जबकि उसने शुभम को दो साल का फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी कर दिया। इस फर्म से दवा का कभी काम नहीं हुआ। यह सिपशुभम एवं गिरोह के अन्य सदस्यों को अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने के लिए बनी। विकास सिंह के बनाए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर शुभम जायसवाल ने शैली ट्रेडर्स के कम्पीटेन्ट पर्सन के रूप में कफ सिरप की तस्करी की।
बेटा शुभम के साथ दुबई में, पत्नी गई थी जेल
शुभम के सिंडीकेट में शामिल विकास सिंह का पुत्र वरुण सिंह भी कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमे में नामजद है। वह भी शुभम जायसवाल के साथ दुबई में छिपा हुआ है। पुलिस के अनुसार विकास सिंह की ससुराल रांची में है। उसने ही रांची में फर्म डालने की सलाह दी। फर्म खुलने के बाद वहां का काम देखने के लिए विकास ने अपने बेटे वरुण को लगा दिया। यहीं नहीं, काले धन को सफेद करने के लिए जो रुपये वाराणसी आते थे, उन्हें विकास की पत्नी बबिता के खाते में जमा कराया जाता था। कोतवाली पुलिस ने बबिता को भी गिरफ्तार किया था।
