गैरसैंण (चमोली): उत्तराखंड विधानसभा के सत्र का आगाज 27 अक्टूबर यानि आज से होने जा रहा है. विधानसभा का सत्र राजधानी देहरादून में नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में होगा. 2 दिन तक चलने वाले इस सत्र के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. वहीं दो दिवसीय सत्र के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी समेत कैबिनेट मंत्री और विधायक भराड़ीसैंण पहुंच गए हैं.
विधानसभा सत्र में धामी सरकार करोड़ों रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी. यह बजट राज्य के विकास कार्यों को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए होगा.अनुपूरक बजट के अलावा सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन में लाएगी. इसके साथ ही विभिन्न विभागों की वार्षिक रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी.
प्रदेश की राजनीतिक लिहाज से यह विधानसभा सत्र बेहद अहम माना जा रहा है. साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार का यह आखिरी अनुपूरक बजट सत्र माना जा रहा है. इस विधानसभा सत्र में धामी सरकार इस बजट में जनता से जुड़ी कई नई योजनाओं का एलान कर सकती है. सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी घोषणाएं कर सकती है. वहीं विपक्ष भी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था और जोशीमठ आपदा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है. वहीं सदन में हंगामे के भी आसार जताए जा रहे हैं.
वहीं उत्तराखंड में ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती और लंबे समय से लंबित मांगों के खिलाफ प्रदेश के ग्राम प्रधान मुखर हैं. ‘प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड’ द्वारा आज गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव का बड़ा कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें प्रदेश भर से हजारों ग्राम प्रधानों के जुटने की उम्मीद है. आंदोलन और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी है.
गौर हो कि 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधान संगठन लंबे समय से संघर्ष कर रहा है. इससे पहले देहरादून में किए गए सचिवालय कूच के दौरान सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी फाइलें शासन स्तर पर ही विचाराधीन हैं. शासन प्रशासन की इस लेटलतीफी और टालमटोल की नीति से ग्राम प्रधानों में भारी रोष है.
