शिमला। प्रदेश में दिवाली के पटाखों का शोर शांत होते ही धर्मशाला की बर्फीली वादियों के बीच सियासी गर्माहट देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का यह अंतिम शीतकालीन सत्र 16 से 21 नवंबर के बीच तपोवन (धर्मशाला) स्थित विधानसभा भवन में आयोजित होने जा रहा है।
6 दिनों तक चलने वाले इस सत्र को लेकर सचिवालय में तैयारियां तेज हो गई हैं और जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी होने वाली है।कार्यकाल के अंतिम शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तय मानी जा रही है। सत्र का आगाज पारंपरिक शोकोद्गार के साथ होगा। 6 बैठकों वाले इस सत्र में एक दिन गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के रूप में आरक्षित किया गया है।
अधिसूचना जारी होते ही विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं, विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों को लेकर आनलाइन व आफलाइन दोनों माध्यमों से सवाल और विभिन्न नियमों के तहत चर्चा के नोटिस भेज सकेंगे। सरकार भी कई अहम संशोधन विधेयकों को सदन के पटल पर रखकर पारित कराने की रणनीति बना रही है।
पर्यटन राजधानी को ध्यान में रखकर बदला शेड्यूल
सत्र को दिसंबर के बजाय नवंबर में आयोजित करने का मुख्य कारण कांगड़ा का पर्यटन कारोबार है। सरकार ने कांगड़ा को पहले ही प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया है। दिसंबर का पीक पर्यटन सीजन रहता है।
ऐसे में दिसंबर में धर्मशाला, मैकलोडगंज और आसपास के इलाकों में पर्यटकों का भारी जमावड़ा होता है। सत्र के चलते वीआईपी आवाजाही से स्थानीय कारोबार और पर्यटकों को परेशानी न हो, इसलिए लगातार दूसरे वर्ष यह सत्र नवंबर के तीसरे हफ्ते में समेटा जा रहा है।
पिछली बार 8 दिन का था सत्र
वर्ष 2025 में शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक चला था, जिसमें रिकार्ड 8 बैठकें हुई थीं। इस बार इसे 6 बैठकों तक सीमित रखा गया है।
अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश पर रोक
सत्र की रूपरेखा तय होते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए दिवाली के तुरंत बाद विधानसभा और संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी जाएगी। आपात या विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी कर्मचारी को सत्र समाप्त होने तक अवकाश की अनुमति नहीं होगी।
