पटना: बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर अब एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू होगा. राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैय्यद अता हसनैन ने सभी विश्वविद्यालयों को इसे तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है. इसके तहत 30 जून तक नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और 1 जुलाई से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी.
शैक्षणिक कैलेंडर का हो पालन: राजभवन सचिवालय द्वारा जारी आदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक अनुशासन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. सभी कुलपतियों को निर्देश दिया गया है कि शैक्षणिक कैलेंडर का पालन किया जाए. केवल असाधारण परिस्थितियों में अधिकतम 7 दिन का विचलन स्वीकार्य होगा.
सेमेस्टर सिस्टम को मिलेगा नया रूप: नए कैलेंडर के अनुसार ऑड सेमेस्टर (1, 3, 5 एवं 7) जुलाई से दिसंबर तक और इवेन सेमेस्टर (2, 4, 6 एवं 8) जनवरी से जून तक चलेंगे. पहले सेमेस्टर का नामांकन 1 मई से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा. कक्षाएं 1 जुलाई से शुरू होंगी.
महत्वपूर्ण तारीख तय: मध्य सेमेस्टर परीक्षा 11 से 16 सितंबर, कक्षाएं 20 नवंबर को समाप्त होंगी. प्रायोगिक परीक्षा 20 से 26 नवंबर और मुख्य परीक्षा 27 नवंबर से 16 दिसंबर तक होगी. परिणाम 10 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। इसी तरह अन्य ऑड सेमेस्टर की भी यही व्यवस्था रहेगी.
इवेन सेमेस्टर की समय-सारणी: दूसरे, चौथे, छठे और आठवें सेमेस्टर का नामांकन 4 जनवरी से शुरू होकर 9 जनवरी तक चलेगा. कक्षाएं 4 जनवरी से शुरू होंगी. मध्य सेमेस्टर परीक्षा 15-20 मार्च, कक्षाएं 30 अप्रैल को खत्म होंगी. प्रायोगिक परीक्षा 1-6 मई और सैद्धांतिक परीक्षा 6 से 24 मई तक होगी। परिणाम 20 जून को जारी होंगे.
छात्रों को मिलेगा बेहतर अवसर: यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम को प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी. छात्रों को अब शैक्षणिक गतिशीलता, क्रेडिट ट्रांसफर और बेहतर अवसर मिल सकेंगे.
कई कैलेंडरों से मिलेगी राहत: पहले बिहार के विश्वविद्यालयों में अलग-अलग शैक्षणिक कैलेंडर होने के कारण छात्रों को नामांकन, परीक्षा और रिजल्ट में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था. कई विश्वविद्यालयों में सत्र काफी विलंब से चलते थे. अब एकरूपता आने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी.
उच्च शिक्षा में अनुशासन और गुणवत्ता बढ़ेगी: राजभवन का यह कदम बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और अनुशासित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सभी विश्वविद्यालयों को आगामी सत्रों में भी इस कैलेंडर का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
