
हरियाणा सरकार ने ऊंची और हाई-रिस्क इमारतों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब केवल सरकारी निरीक्षण के आधार पर ही ओसी जारी नहीं होगा, बल्कि थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन मॉडल भी लागू किया जाएगा। इसके तहत सूचीबद्ध और अनुभवी आर्किटेक्ट्स भवनों का तकनीकी निरीक्षण और सत्यापन करेंगे, जिसके आधार पर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और मंजूरी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा। नई व्यवस्था को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और प्रशासनिक सुधारों के तहत लागू किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बिल्डरों और डेवलपर्स को तय समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराना, अनावश्यक देरी खत्म करना और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे निर्माण परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन के लिए योग्य आर्किटेक्ट्स का विशेष पैनल तैयार करेगा। इसके लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया की निगरानी पांच सदस्यीय समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य नगर योजनाकार (हरियाणा) करेंगे। समिति पात्रता की जांच के बाद योग्य विशेषज्ञों को पैनल में शामिल करेगी।
सरकार ने इस व्यवस्था के लिए सख्त पात्रता मानक तय किए हैं। केवल वही आर्किटेक्ट्स पैनल में शामिल होंगे जिनका काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए) में वैध पंजीकरण होगा। इसके अलावा हाई-रिस्क भवनों के डिजाइन और निर्माण में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव तथा हरियाणा में पांच हाई-रिस्क परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने का रिकॉर्ड भी अनिवार्य होगा। अब तक हाई-रिस्क भवनों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए विभागीय निरीक्षण ही प्रमुख आधार था, लेकिन नई व्यवस्था में अधिकृत आर्किटेक्ट्स का तकनीकी प्रमाणन भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे विभाग पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बिल्डरों को समय पर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिल सकेगा और पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही व गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
