देहरादून। उत्तराखंड को पर्यटन के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित किए जाएंगे, जहां साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि लोकभाषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
बुधवार को सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित संस्कृति सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति प्रदेश की आत्मा और पहचान है। जागर, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे लोकगीतों से लेकर ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के आधार हैं।
सरकार इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य को केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें इसी सोच का हिस्सा हैं।
लोकभाषाओं और बोलियों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता: सीएम धामी
मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक कलाकारों को मंच और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। ढोल-दमाऊ समेत पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जुड़े पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निश्शुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है।
लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन तीन हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये की गई है। वर्तमान में 180 कलाकार इसका लाभ ले रहे हैं। नई पीढ़ी को लोककलाओं से जोड़ने के लिए छह माह की गुरु-शिष्य प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किया जाएगा, जिसके तहत पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ से अब तक 57 साहित्यकार सम्मानित किए जा चुके हैं। वहीं ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की सम्मान राशि पांच लाख 51 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकभाषाओं और बोलियों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में है। इसके लिए समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सहयोग से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए और समृद्ध बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
गीतों के अंग्रेजी अनुवाद की पुस्तक का भी लोकार्पण
पहाड़ की लोकसंस्कृति, जनजीवन और संवेदनाओं को गीतों में आवाज देने वाले गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिन पर बुधवार को सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में संस्कृति का रंग जमा। अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात रंगकर्मी, अभिनेता और नाटककार ताई तुगुंग को तीसरा ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें अंगवस्त्र, प्रशस्तिपत्र और 2.51 लाख रुपये की सम्मान राशि देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेगी के गीतों में उत्तराखंड का जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार जीवंत होते हैं। उन्होंने कहा कि नेगी ने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनके गीत पहाड़वासियों के दिल की धड़कन बन चुके हैं।
नेगी ने अपनी रचनाओं में पहाड़ के सुख-दुख और बदलते सामाजिक परिवेश को जिस तरह स्वर दिया, वह उन्हें लोकसंस्कृति का सशक्त प्रतिनिधि बनाता है। मुख्यमंत्री ने ताई तुगुंग के सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगमंच और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है।
उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’, जिसका प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ, उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। सम्मान ग्रहण करने के बाद ताई तुगुंग ने उत्तराखंड के लोक समाज का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी जैसे महान लोक कलाकार के नाम पर मिला सम्मान उनके लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।
समारोह में नरेंद्र सिंह नेगी के चुनिंदा गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक ‘माउंटेन मेलोडीज ऑफ नरेंद्र सिंह नेगी’ का भी लोकार्पण किया गया। पुस्तक के लेखक उत्कर्ष भट्ट हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेगी के गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद उत्तराखंड की लोकभाषा और संस्कृति को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है।
नेगी ने मुख्यमंत्री और आयोजकों का आभार जताते हुए ताई तुगुंग को सम्मान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सम्मान के बहाने उत्तराखंड को अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति और सभ्यता को करीब से जानने का अवसर मिला है। हिमालयी राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बलूनी ग्रुप के चेयरमैन नवीन बलूनी ने की। उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी जैसे गीतकार सदियों में पैदा होते हैं और उनकी आवाज व गीत पहाड़ की आत्मा के रूप में हर उत्तराखंडी के दिल में बसे हैं। कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, इंद्रजीत सिंह नेगी, शिव प्रसाद सेमवाल, दिग्मोहन नेगी समेत साहित्यकार, कलाकार और संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे।
