चंपावत। पांच अगस्त 2025 को भारी बारिश के कारण सड़कें भूस्खलन से बंद हो गई थीं। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे थे और स्कूल जाने का रास्ता बाधित हो गया था। स्कूल में गृह परीक्षाएं चल रही थीं, लिहाजा स्कूल पहुंचना जरूरी था।
ग्राम घुरचुम, पोस्ट कोटा जमराड़ी निवासी 17 वर्षीय माया कांडपाल अपनी सहेलियों के साथ आपदा के इस झंझावत का बहादुरी के साथ सामना कर रहीं थी। इतने में ही आरती और कोमल ने स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करने का निर्णय लिया।
इसी दौरान नदी के प्रचंड तेज बहाव में कोमल और आरती बहने लगीं। तब 12वीं की छात्रा रही माया ने अपनी जान जोखिम में डालकर तुरंत उफनती नदी में छलांग लगा दी और पूरी ताकत झोंककर दोनों सहेलियों को डूबने से बचाते हुए सुरक्षित किनारे तक पहुंचा दिया।
इस बचाव अभियान के दौरान माया स्वयं भी घायल हो गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। चोटिल होने के बावजूद माया दोनों बालिकाओं को सुरक्षित बचाकर स्कूल पहुंची और परीक्षा दी।
माया के इस अदम्य साहस, तत्परता और मानवीय संवेदना को देखते हुए जनपद स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने उसे इस सम्मान के लिए चुना गया है। उन्हें छह नवंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।
माया के पिता भुवन चंद्र कांडपाल ने पुत्री के साहस और शौर्य को सम्मानित करने के निर्णय का स्वागत किया है। माया कांडपाल ने वर्ष 2026 में अपनी इंटरमीडिएट की परीक्षा 86.6 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी।
