शिमला: दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई अहम बैठक ने हिमाचल प्रदेश की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है. राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे, जहां संगठन और सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई. इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की गई. संभावित उम्मीदवारों के चयन, विधायकों की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. पिछली बार राज्यसभा चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए इस बार किसी भी तरह की चूक न हो, इस पर विशेष जोर दिया गया.
संगठन और सरकार के तालमेल पर फोकस
बैठक में प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं, बजट प्रावधानों के क्रियान्वयन और संगठन-सरकार के बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई. हाईकमान ने सरकार के कामकाज को लेकर फीडबैक लिया और स्पष्ट संदेश दिया कि राजनीतिक अनुशासन और रणनीतिक एकता बनाए रखना जरूरी है.
RDG बंद होने पर गहन मंथन
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) का मुद्दा भी बैठक के केंद्र में रहा. वित्त आयोग द्वारा RDG बंद करने की सिफारिश के बाद प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है. हाल ही में विधानसभा बजट सत्र में नियम 102 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा हुई और केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया. दिल्ली बैठक में इस विषय पर लंबी चर्चा हुई और इसे संसद में उठाने का आश्वासन दिया गया.
बैठक में संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत RDG के प्रावधान और इसके कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया गया. प्रदेश के बजट में RDG की हिस्सेदारी लगभग 12.70 प्रतिशत है. इसके बंद होने से अगले पांच वर्षों में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान की आशंका जताई गई. इसके अलावा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी मंथन किया गया. कुल मिलाकर, दिल्ली में हुई यह बैठक राज्यसभा चुनाव और प्रदेश की वित्तीय स्थिति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
