मेरठ। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सोमवार को हुई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट का आदेश वेबसाइट पर अपलोड हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर क्षेत्र में विकसित की गई अवैध कालोनियों के मामले में गहन जांच करने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित कर दिया है। यह आयोग पांच बिंदुओं पर पूरे मामले की जांच करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पार्डीवाला और न्यायाधीश केवी विश्वनाथन ने सोमवार 21 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान उल्देपुर क्षेत्र में हुए अवैध कालोनी के निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने प्रतिवादी विभाग के अधिवक्ता से इन कालोनियों के संबंध में जानकारी ली तो बताया गया कि इन आवासीय कालोनी की जमीन निजी है ।
मेरठ विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया गया है। कोर्ट ने उल्देपुर के अवैध निर्माण की गहन जांच के लिए पांच बिंदु निर्धारित किए और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को न्यायिक आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करते हुए जांच प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए अन्य सदस्यों को भी शामिल करने की अनुमति दी है। प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी गुरु प्रसाद को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
आयोग को सचिवालय तथा प्रशासनिक सहायता उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग के सदस्यों को भुगतान किए जाने वाले पारिश्रमिक के लिए राज्य सरकार को 35 लाख रुपये एक सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश भी दिया गया है। मेडा उल्देपुर में प्रत्येक अवैध निर्माण को जल्द से जल्द ध्वस्त करें। इस ध्वस्तीकरण के दौरान उत्पन्न होने वाले मलबे को भी प्रतिदिन प्रभावित तरीके से हटाया जाए।
जांच के पांच बिंदु
1: क्या उन भू-खंडों की भूमि, जिन पर अवैध आवासीय कालोनियां बनाई गई हैं, सरकार के स्वामित्व में है?
2: यदि भूमि सरकार की नहीं है, तो इन विशाल भू-खंडों के वैध स्वामी कौन-कौन हैं?
3: यदि जांच में यह सामने आता है कि भूमि सरकार की नहीं बल्कि विभिन्न निजी व्यक्तियों की है, तो भूमि स्वामियों और खरीदारों के बीच लेन-देन किस प्रकार हुआ?
4: मेडा पांच वर्ष से अधिक समय तक क्यों निष्क्रिय रहा और उसने अपनी आंखों के सामने इन अवैध आवासीय कालोनियों को विकसित होने की अनुमति क्यों दी?
5: क्या ये अवैध आवासीय कालोनियां मेडज्ञ के अधिकारियों की मिलीभगत एवं सांठगांठ से विकसित हुईं और यदि ऐसा है, तो इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?
