शिमला। हिमाचल प्रदेश में व्यापार और टैक्स प्रणाली अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी होने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू विधानसभा के मौजूदा मानसून अधिवेशन में एक बेहद अहम हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 (विधेयक संख्यांक 14) पेश किया है। सरकार की ओर से पेश किए गए वित्तीय ज्ञापन के अनुसार, इस नए कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार को खजाने से कोई अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
यह पूरी तरह से मौजूदा सरकारी मशीनरी के माध्यम से ही लागू किया जाएगा। इस नए बिल के पास होते ही राज्य में केंद्र के समान ही जीएसटी के नए नियम लागू हो जाएंगे, जिसका सीधा असर कारोबारियों के टैक्स क्रेडिट और रिफंड पर पड़ेगा।
कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा
डिस्काउंट पर नई और सख्त व्यवस्था में किए गए अहम संशोधन के तहत, यदि कोई व्यापारी माल की सप्लाई होने के बाद कोई छूट देता है और उसके लिए क्रेडिट नोट जारी करता है, तो माल खरीदने वाले (प्राप्तकर्ता) को उस छूट की एवज में अपना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) वापस करना होगा। अधिनियम की धारा 54 में संशोधन के जरिए रिफंड के नियमों को और स्पष्ट किया गया है।
अब बिना उपयोग किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट और कर का भुगतान करके भारत से बाहर निर्यात किए गए माल के मामलों में रिफंड दावों की प्रक्रिया में नए प्रावधान जुड़ेंगे।
आखिर क्यों पड़ी इस नए बिल की जरूरत?
जीएसटी परिषद का निर्देश है कि यह सब एक राष्ट्र, एक कर के विजन को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। केंद्र सरकार जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर पहले ही केंद्रीय जीएसटी अधिनियम में ये बदलाव कर चुकी है। पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब हिमाचल सहित सभी राज्यों के लिए अपने-अपने राज्य कानूनों में यह संशोधन करना अनिवार्य हो गया है।
