शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करने को पहाड़ी राज्यों के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल को 50 हजार करोड़ का नुकसान होगा और यह सहकारी संघवाद के खिलाफ है।
उन्होंने केंद्र से अनुदान बहाल करने और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की। उन्होंने नाबार्ड से स्वीकृत 713.87 करोड़ रुपये की 73 योजनाओं की समीक्षा भी की।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान वर्ष 1952 से 15वें वित्त आयोग तक राज्यों की वित्तीय स्थिरता के लिए निरंतर मिलता रहा है। इसे 16वें वित्त आयोग ने पहली बार बंद किया है, जो हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी व कठिन भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य के प्रति अन्याय है।
उन्होंने कहा, “हिमाचल प्रदेश पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर देश के पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ हिमाचल से बहने वाली नदियों के माध्यम से पानी भी उपलब्ध करवाता है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करना प्रदेश के हितों के साथ कुठाराघात है।”
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड से 713.87 करोड़ रुपये की 73 योजनाएं स्वीकृत करवाई जा चुकी हैं। इन स्वीकृत योजनाओं में 512.31 करोड़ रुपये की 55 विधायक प्राथमिकता योजनाएं लोक निर्माण विभाग से संबंधित हैं और 201.56 करोड़ रुपये की 18 विधायक प्राथमिकता योजनाएं जल शक्ति विभाग की हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि बजट का पूर्ण उपयोग किया जाए और नाबार्ड कार्यालय में प्रतिपूर्ति दावे 15 मार्च से पहले जमा करें। इसके अतिरिक्त मार्च, 2026 तक नाबार्ड से और अधिक विधायक प्राथमिकताओं को स्वीकृत करवाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार के तीन वर्ष लोक कल्याण नीतियों, पारदर्शी शासन और व्यापक सुधारों का रहा है। हमारी सरकार की नीतियों का लक्ष्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदुढ़ करना, युवाओं, महिलाओं को सशक्त बनाना, कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना और हिमाचल प्रदेश को समृद्धशाली, हरित ऊर्जा सम्पन्न व आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करना है।
राजस्व घाटा अनुदान बंद करने से 50 हजार करोड़ का नुकसान
15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 37199 करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान की सिफारिश की थी। इसके अलावा कोरोना काल के दौरान पिछली भाजपा सरकार को वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी। उन्होंने कहा कि अनुदान बंद कर देने से राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
वित्तीय प्रबंधन के साथ आय बढ़ाने के लिए कड़े फैसले लेने होंगे
प्रदेश सरकार को अब कुशल वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए कड़े फैसले लेने पड़ेंगे। केंद्र सरकार के आगामी बजट में मध्यम वर्ग और किसानों की अनदेखी की गई है। प्रदेश में अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि एवं बागवानी है, लेकिन केंद्रीय बजट में बागवानों के लिए न तो किसी सब्सिडी का प्रावधान है और न ही किसी बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र है। भानुपल्ली-बिलासपुर एवं चण्डीगढ़- बद्दी रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए भी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है।
