लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय खोलना अब पहले से आसान हो जाएगा। मान्यता के नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी, स्वायत्तशासी, सांविधिक, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकायों की जमीन पर भी विद्यालय खुल सकेंगे। 30 वर्ष की रजिस्टर्ड लीज पर भी विद्यालयों को मान्यता मिल सकेगी। इसके साथ ही मान्यता के लिए आनलाइन आवेदन पोर्टल वर्षभर खुला रहेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए परिषद विनियमों के अध्याय-7 में संशोधन और कुछ प्रविधानों को सरल किया है।
अब केवल समिति, ट्रस्ट या गैर-लाभकारी कंपनी (नाट फार प्राफिट) ही नहीं, बल्कि सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय की भूमि पर भी वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों को मान्यता दी जा सकेगी। यदि लीज समाप्त हो जाती है तो विद्यालय की मान्यता भी स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
भूमि के न्यूनतम मानकों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। शहरी क्षेत्र में विद्यालय के लिए कम से कम 3000 वर्गमीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 6000 वर्गमीटर भूमि होना जरूरी होगा।
इनमें क्रमशः 1000 और 2000 वर्गमीटर का खेल मैदान अनिवार्य रहेगा। खेल मैदान विद्यालय से अधिकतम 200 मीटर की दूरी पर हो सकेगा, लेकिन दोनों सड़क के एक ही ओर होने चाहिए। सरकार ने 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त विद्यालयों को भी राहत दी है।
ऐसे विद्यालयों पर पुराने भूमि मानक ही लागू रहेंगे। यदि वे इंटरमीडिएट स्तर पर नए वर्ग, अतिरिक्त सेक्शन या नए विषय की मान्यता चाहते हैं तो उन्हें केवल अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला उपलब्ध होने का प्रमाण देना होगा।
हालांकि, 31 मई तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर आवेदन करने वाले विद्यालयों के प्रस्ताव पर अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा। इसके बाद आवेदन करने वाले संस्थानों की मान्यता पर अगले वर्ष विचार होगा।
