लखनऊ। मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को उच्च सदन (विधान परिषद) में 83 मिनट तक अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा गूंजता रहा। सपा सदस्यों ने यह मुद्दा उठाते हुए सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा की मांग की। नेता सदन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर देते हुए सपा को सनातन विरोधी बताया।
इस पर सपा सदस्य नारेबाजी करते हुए सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह के आसन के समक्ष आ गए। जिसके बाद सदन की कार्यवाही को आधा घंटे लिए स्थगित कर दिया गया, परंतु दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही सपा सदस्य फिर आसन के सामने आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। नेता सदन ने नारेबाजी के बीच ही अपना वक्तव्य पूरा किया। इसके बाद सपा अपनी सीटों पर लौट गए।
प्रश्नकाल के बाद दोपहर साढ़े 12 बज सपा सदस्यों ने यह मामला उठाते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था में भ्रष्टाचार हुआ है। आरोप लगाया कि सरकार ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाने का काम कर रही है।
नेता विपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि भाजपा और आरएसएस का ट्रस्ट बना दिया गया है। 15 में से 12 सदस्य आरएसएस के हैं और तीन सरकार ने नामित किए हैं। भगवान राम आपसे बहुत नाराज हैं। आप अयोध्या में हारे, फिर भी आपको कुछ समझ नहीं आ रहा।
किरन पाल कश्यप ने कहा कि चंदा चोरी तो 1990 से हो रही थी। अब चढ़ावा चोरी पकड़ी गई है। इसके उत्तर में नेता सदन ने कहा कि 500 साल बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना। इसके लिए अनेक बलिदान हुए। आपने तो निहत्थे राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं।
बाबर से रिश्ता जोड़ने वाले राम मंदिर की बात कर रहे हैं। इस पर सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। दोपहर 12.53 बजे वे नारेबाजी करते हुए सभापति के आसन के सामने आ गए। वक्तव्य देने के लिए खड़े हुए तो सपा सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
13 मिनट तक हंगामे के बाद सभापति ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी और बाद में इसे 15 मिनट और बढ़ा दिया। दोपहर 1.36 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो सपा सदस्य फिर आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। इस दौरान नेता सदन ने अपना वक्तव्य जारी रखा।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने एक पैसा चंदा नहीं दिया, वह चंदा चोरी की बात कर रहे हैं। बाबरी के नाम पर कितना चंदे के रूप में लिया गया है और उसमें से कितना सपा के खाते में गया है। सपा-कांग्रेस ने हमारे मंदिरों को तोड़ने का काम किया।
इस दौरान सपा सदस्य उत्तर सुनने के बजाय लगातार नारेबाजी करते रहे। नेता सदन का वक्तव्य पूरा होने पर सभापति से कार्यस्थगन को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सपा सदस्य आसन के सामने से हटे।
