हमीरपुर/महोबा : बुंदेलखंड की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री बादशाह सिंह ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है. अपने फैसले के पीछे उन्होंने लंबे राजनीतिक सफर और व्यक्तिगत कारणों का जिक्र किया है.
बादशाह सिंह ने वर्ष 1987 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर राजनीति की शुरुआत की थी. 1988 में वे खरेला नगर पंचायत अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद 1989 में मौदहा विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
1991 के मध्यावधि चुनाव में जीत दर्ज कर वे पहली बार विधायक बने. इसके बाद वे चार बार विधायक रहे और लंबे समय तक मौदहा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.
2007 में उन्होंने भाजपा छोड़कर बसपा का दामन थामा और मौदहा सीट से चुनाव जीतकर प्रदेश सरकार में श्रम एवं लघु उद्योग मंत्री बनाए गए.
परिसीमन के बाद मौदहा विधानसभा सीट समाप्त हो गई. 2012 में उन्होंने महोबा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी में शामिल होकर अखिलेश यादव का समर्थन किया.
संन्यास के फैसले पर बादशाह सिंह ने कहा कि वे करीब 40 वर्षों से लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं और अब विराम लेना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लंबे समय से लगातार काम करते-करते अब व्यक्तिगत जीवन के लिए समय निकालने की जरूरत महसूस हुई है.
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में कभी पद या पैसे के लिए काम नहीं किया और हमेशा जनता के बीच रहकर कार्य किया. हमारी पहचान राजनीति या कुर्सी से नहीं, बल्कि लोगों से है. हमने हमेशा जनता के काम को प्राथमिकता दी.
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों का सहयोग मिला, जिसकी वजह से वे लंबे समय तक जनप्रतिनिधि बने रहे. साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग का भी उल्लेख किया. अब उनके संन्यास के फैसले के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल बनी हुई है और विभिन्न दलों के नेताओं की नजर आगे बनने वाले नए समीकरणों पर टिकी हुई है.
