हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय प्रबंधन को लेकर राज्य वन्यजीव बोर्ड (स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ) का पुनर्गठन कर दिया है। वन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा-6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बोर्ड का नए सिरे से गठन किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वन मंत्री को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बोर्ड में विधायकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, वन एवं वन्यजीव विशेषज्ञों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है।
सरकार ने कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, अर्की से विधायक संजय अवस्थी और फतेहपुर से विधायक भवानी सिंह पठानिया को बोर्ड का सदस्य नामित किया है। इसके अलावा हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) शिमला के निदेशक को गैर सरकारी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। बोर्ड में वन विभाग के प्रशासनिक सचिव, जनजातीय विकास विभाग के प्रशासनिक सचिव, प्रधान मुख्य अरण्यपाल, पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक, शिमला के आईजीपी, पशुपालन निदेशक और मत्स्य विभाग के निदेशक को भी सदस्य बनाया गया है।
इसके अतिरिक्त भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों को भी बोर्ड में शामिल किया गया है। हिमाचल प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन) बोर्ड के सदस्य सचिव होंगे। अधिसूचना के अनुसार बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से तीन वर्ष का होगा। बोर्ड के कार्य और दायित्व वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा-8 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होंगे।
