अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का हाईप्रोफाइल मामला पुलिस जांच के अंतिम और अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है। बहुचर्चित मामले की चार्जशीट दायर करने की 90 दिन की वैधानिक समय सीमा 22 सितंबर को पूरी हो रही है। अगर कल तक चार्जशीट दायर नहीं हुई तो सभी आठ आरोपियों को जमानत मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। ऐसे में कहा जा रहा है कि कभी भी अब चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की जा सकती है। चोरी का मामला सामने आने और एसआईटी के निर्देश के बाद 25 जून को थाना रामजन्मभूमि में आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र को नामजद किया गया था। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 305,306,316(5)317(4)317 (5) 61, 3(5)13(1) (ए) के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोपियों पर मंदिर से चोरी, कर्मचारी के रूप में संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति का कारोबार करने/उसे छिपाने-ठिकाने लगाने में मदद, आपराधिक षड्यंत्र और साझा मंशा से अपराध करने के आरोप हैं।
किस पर क्या आरोप
1. पुलिस के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां थीं और मंदिर के कामकाज में उसका सीधा दखल था।
2. अनुकल्प मिश्र नकदी की गणना से जुड़ा था और जांच में उसे मामले का प्रमुख आरोपी बताया गया। उसके घर से करीब 20 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
3. लवकुश मिश्र भी नकदी की गणना से जुड़ा था और उसके घर से करीब दस लाख रुपये मिले थे।
4. मनीष यादव टिन्नू का भतीजा है और गणना के काम से जुड़ा था।
5. सुभाष श्रीवास्तव केनरा बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद ट्रस्ट से जुड़े थे और नकदी की गणना की निगरानी से जुड़े थे।
6. अविनाश शुक्ल गणना के काम से जुड़ा था और उसके खाते से पांच लाख रुपये रिकवर किए गए थे।
7. करुणेश पांडेय भी गणना से जुड़ा था और अनुकल्प के करीबी के तौर पर जांच में सामने आया।
8. रमाशंकर मिश्र भी नकदी गणना से जुड़ा था और उसके पास से नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी।
क्या कुछ खंगाला गया
पुलिस सूत्रों के अनुसार विवेचना अधिकारी ने लगभग सभी बिंदुओं पर जांच पूरी कर ली है। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, चढ़ावा काउंटिंग से जुड़े रजिस्टरों की जांच की गई और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी चार्जशीट में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी की कार्यप्रणाली, आरोपियों की भूमिका और बरामदगी का विवरण रखा गया है।
90 दिन में चार्जशीट नहीं तो डिफाल्ट बेल
वरिष्ठ अधिवक्ता वाईबी मिश्रा के अनुसार, ऐसे अपराध में यदि कानून के तहत 90 दिन की अवधि लागू होती है और इस अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो आरोपी को वैधानिक यानी डिफाल्ट बेल का अधिकार मिल सकता है। मामले में 90 दिन की अवधि 22 सितंबर को पूरी हो रही है।
