मनाली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान हिमाचल के रहन-सहन, परिधानों में खासी रुचि दिखाई। लाहुल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने बुधवार को अटल टनल रोहतांग दौरे के दौरान पारंपरिक लाहुली परिधान (चोलू) पहनकर राष्ट्रपति का स्वागत किया तो उन्होंने इसके बारे में जानकारी ली।
विधायक के साथ अलग से फोटो भी खिंचवाए। शाम में राष्ट्रपति मनाली के माल रोड पर घूमी तो उन्होंने हथकरघा उत्पादों को पसंद किया। भुट्टिको वीवर्स से कुल्लवी शाल व अन्य सामान खरीदा। इस दौरान उन्होंने तिब्बत इंपोरियम से सीबकथार्न, तिब्बतियन हर्बल हेल्थ केयर पेन आयल व कुछ और सामान खरीदा।
मनाली दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने पारंपरिक व्यंजनों और वस्त्रों को विशेष तरजीह दी। कुट्टू के आटे का परांठा व काउनी, ओघला, बेसा का सूप। बाथू की खीर, कच्चा पपीता व खुमानी का मीठा, गुच्छी व रागी का सूप व लाल चावल मुख्य रूप से उनके भोजन में शामिल रहे।
राष्ट्रपति ने की हिडिंबा देवी की पूजा
राष्ट्रपति ने देश की सुख व समृद्धि के लिए माता हिडिंबा मंदिर में विशेष पूजा की। परंपरा का सम्मान करते हुए भांग के पौधों के रेशों से तैयार पूलें पहनकर राष्ट्रपति मंदिर में गईं। मंदिर परिसर में उनका हिमाचली संस्कृति के अनुसार स्वागत हुआ। उनके साथ हिमाचल के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता और मंडी की सांसद कंगना रनौत भी मौजूद रहीं।
पुरोहित मेहर चंद ने राष्ट्रपति से विधिवत पूजा करवाई। मंदिर के पुजारी रमण शर्मा ने उन्हें पैगोड़ा शैली में 16वीं शताब्दी में बने मंदिर के इतिहास और महाभारत काल से जुड़े इसके महत्व के बारे में बताया।
बच्चों को बांटी चॉकलेट
माल रोड भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति ने बच्चों को चाकलेट बांटी। अटल टनल दौरे के दौरान विधायक अनुराधा राणा के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से नौतोड़ पर एफसीए में छूट की मांग रखी। उन्होंने अवगत करवाया कि जनजातीय क्षेत्रों में किन्नौर, लाहुल स्पीति, पांगी व भरमौर में नौतोड़ भूमि के बहुत से मामले लंबित हैं।
राष्ट्रपति वीरवार दिन में 10 बजे के बाद दिल्ली लौट गईं। एम्स बिलासपुर के दीक्षा समारोह में मेधावियों को सम्मानित करने से शुरू हुआ राष्ट्रपति का तीन दिवसीय प्रवास हिमाचल की ग्रामीण संस्कृति की यादों के साथ समाप्त हुआ।
सी बकथार्न
सीबकथार्न हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक कांटेदार झाड़ीनुमा पौधा है। यह भारत में मुख्य रूप से ठंडे और शुष्क हिमालयी क्षेत्रों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (लाहुल स्पीति, किन्नौर), उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में उगता है।
यह अत्यधिक ठंड और कठिन जलवायु वाले ऊंचे इलाकों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके मुख्य गुण और फायदे इसमें आंवले और संतरे से कई गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है।
इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। इसका उपयोग त्वचा में चमक लाने, लिवर, हृदय और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है।
तिब्बतिन हर्बल हेल्थ केयर पेन ऑयल
तिब्बतिन चिकित्सा पद्धति पर आधारित हर्बल पेन आयल मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और शारीरिक थकान को दूर करने के लिए जाना जाता है। यह घुटनों, कमर और अन्य जोड़ों के पुराने दर्द को कम करने में मदद करता है।
जोड़ों की मूवमेंट और लचीलेपन में सुधार होता है। मांसपेशियों, स्नायुबंधन और तंत्रिकाओं को शांत करता है। शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।
