लखनऊ। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान बाहर हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के लिए अब पंचायत चुनाव की मतदाता सूची की भी मदद ली जाएगी। भारत निर्वाचन आयोग ने 12 नवंबर से शुरू होने वाले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) में छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए यह पहल की है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पंचायत चुनाव की मतदाता सूची से मिलान कर ऐसे मतदाताओं को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जिनका नाम विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं है। पात्र लोगों से फार्म-6 भरवाकर उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
दरअसल, पंचायत और विधानसभा चुनाव की मतदाता सूचियां अलग-अलग निर्वाचन आयोग तैयार करते हैं। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग बनाता है, जबकि लोकसभा व विधानसभा चुनाव की सूची भारत निर्वाचन आयोग तैयार करता है।
मतदाता सूची बन सकती है महत्वपूर्ण आधार
दोनों सूचियों में काफी अंतर है। एसआइआर के बाद बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटने के कारण अब आयोग की प्राथमिकता पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की है। इसके लिए पंचायत चुनाव की मतदाता सूची एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
राज्य निर्वाचन आयोग की इस वर्ष 10 जून को प्रकाशित पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची में 12.59 करोड़ मतदाता दर्ज थे। वहीं, भारत निर्वाचन आयोग की एसआइआर के बाद 10 अप्रैल को प्रकाशित विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में 13.40 करोड़ मतदाता थे। अब एसएसआर में दोनों मतदाता सूचियों का मिलान करने से प्रशासनिक स्तर पर भी सहूलियत रहेगी।
पंचायत चुनाव में जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी निभाते हैं और भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव में भी जिलाधिकारी ही जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं। ऐसे में दोनों मतदाता सूचियों के समन्वय और मिलान के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी उपलब्ध रहेगी।
एसएसआर के दौरान इस व्यवस्था के जरिये पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल कराने और विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को अधिक शुद्ध बनाने पर जोर रहेगा।
राशन की दुकानों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक चलेगा अभियान
खाद्य एवं रसद विभाग की मदद से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर दर्ज राशन कार्ड धारकों के परिवारों में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाएगा, जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। इस अभियान में विशेष रूप से युवा और महिला मतदाताओं के पंजीकरण पर जोर रहेगा। महिला मतदाताओं की संख्या के लिए विशेष अभियान चलेगा।
आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों की समूह सखियों की मदद ली जाएगी। घर-घर भ्रमण के दौरान ये कार्यकर्ता ऐसी पात्र महिलाओं की पहचान करेंगी, जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाओं को पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों 18-19 वर्ष आयु वर्ग के पात्र छात्र-छात्राओं को चिह्नित कर उनका भी पंजीकरण कराया जाएगा। इसके लिए एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल और भारत स्काउट्स एवं गाइड का भी सहयोग लिया जाएगा।
