शिमला। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार पर पेंशनरों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि 18 अगस्त को वित्त विभाग की ओर से जारी ज्ञापन मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ 13 मई को हुई बैठक में दिए आश्वासन के अनुरूप नहीं है।
समिति के अनुसार मुख्यमंत्री ने बैठक में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 31 जुलाई तक कुल बकाया राशि का 40 प्रतिशत भुगतान करने का आश्वासन दिया था। इसमें ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्यूटेशन की राशि भी शामिल थी।
समिति का आरोप है कि नए आदेश में इन मदों का कोई उल्लेख नहीं है। साथ ही सेवाकाल के दौरान संशोधित वेतन के बकाये के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। समिति ने पेंशनरों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर 35 और 15 प्रतिशत बकाया देने के निर्णय का भी विरोध किया।
नेताओं ने कहा कि इससे पेंशनरों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता और लंबे समय से लंबित डीए एरियर का भुगतान न होने पर भी रोष जताया। प्रेस को जारी बयान में सुरेश ठाकुर और भूप राम वर्मा ने कहा कि सरकार यदि अपनी नीति में बदलाव नहीं करती है तो अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित आंदोलन को समय से पहले शुरू किया जा सकता है। इसके लिए जल्द प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा और बकाया देनदारियों का पूरा भुगतान होने तक जारी रखा जाएगा। समिति ने कर्मचारियों और उनके संगठनों से भी आंदोलन में समर्थन देने की अपील की है।
