चंडीगढ़। हरियाणा में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए प्रदान की गई क्रीमीलेयर की आय सीमा को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में विवाद की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, शुक्रवार को विधानसभा में जब यह मुद्दा उठा, तो रिटायर्ड आईएएस एवं आदमपुर के कांग्रेस विधायक चंद्रप्रकाश की समाज कल्याण मंत्री कृष्ण कुमार बेदी से बहस हो गई।
केंद्र सरकार ने क्रीमीलेयर की आय सीमा 2017 में छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये वार्षिक कर दी थी, जबकि हरियाणा सरकार ने इस व्यवस्था को अपने राज्य में 16 जुलाई 2024 से लागू किया है। इस अवधि से पहले क्रीमीलेयर की आय सीमा छह लाख रुपये थी और राज्य सरकार भी छह लाख रुपये वार्षिक मानकर लाभ प्रदान कर रही थी।
कांग्रेस विधायक चंद्र प्रकाश ने विधानसभा में सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने 2017 में क्रीमीलेयर की आय सीमा छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी थी, फिर हरियाणा सरकार ने इसे 2024 से क्यों लागू किया। चंद्र प्रकाश ने आरोप लगाया कि इन आठ सालों में ओबीसी वर्ग के लोगों को छह लाख रुपये वार्षिक क्रीमीलेयर सीमा के हिसाब से लाभ मिले, जबकि मिलने आठ लाख रुपये की आय सीमा के हिसाब से चाहिए थे। आठ सालों में हजारों-लाखों लोग ऐसे होंगे, जिन्हें क्रीमीलेयर की बढ़ी हुई आय सीमा आठ लाख रुपये का लाभ नहीं मिला। इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
क्रीमी लेयर (आठ लाख से अधिक आय सीमा) में आने वाले ओबीसी व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि आठ लाख रुपये वार्षिक तक आय श्रेणी में आने वाले ओबीसी सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के हकदार हैं। समाज कल्याण मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने चंद्रप्रकाश के आरोपों को नकारते हुए कहा कि क्रीमीलेयर की आय सीमा नहीं बढ़ाने से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सरकार की प्राथमिकता वंचित लोगों को लाभान्वित करने की है। इसीलिए इस आय वर्ग में तीन लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोगों को पहले तरजीह दी गई।
इस बीच में मोर्चा संभालते हुए सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि अगर विधायक के पास कोई एक नाम भी ऐसा हो, जो लाभ से वंचित रह गया है, उसके बारे में हमें सूचित करें। उन्होंने चंद्र प्रकाश के आरोपों को सिरे से नकार दिया।
कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आठ सितंबर 1993 को अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को क्रीमी लेयर से बाहर करने के लिए मानदंड तय किए गए थे। आय और संपत्ति की सीमा में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, जबकि दूसरे मानदंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वर्ष 2017 में भारत सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा को बदलकर आठ लाख रुपये प्रति वर्ष कर दिया। इसके अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा भी 16 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से आय सीमा आठ लाख रूपये प्रतिवर्ष तय कर दी गई है।
इस तरह से समझिये क्रीमीलेयर की परिभाषा
क्रीमी लेयर अन्य पिछड़ा वर्ग के उन संपन्न और उन्नत सदस्यों को दर्शाने वाला शब्द है, जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से विकसित हो चुके हैं। ऐसे व्यक्ति, जिनकी पारिवारिक आय आठ लाख रुपये सालाना से अधिक है या माता-पिता उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी (ग्रुप एक-बी) हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। आरक्षण का लाभ सही में जरूरतमंद और पिछड़े लोगों तक पहुंचाना है, न कि पहले से ही समृद्ध लोगों को देना है।
वर्तमान में आठ लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय (वेतन/कृषि आय छोड़कर) वाले परिवार क्रीमी लेयर में आते हैं। अगर माता-पिता संवैधानिक पद पर हैं, सेना में कर्नल या ऊपर की रैंक के हैं, या क्लास-1/क्लास-2 ऑफिसर हैं, तो आय आठ लाख से कम होने पर भी वे क्रीमी लेयर में आ सकते हैं। क्रीमी लेयर में आने वाले ओबीसी व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। इस अवधारणा का परिचय 1992 के इंदिरा साहनी मामले (मंडल आयोग) के बाद हुआ।
