शिमला। हिमाचल में सीनियर नेशनल कबड्डी टीम के चयन में अनियमितता बरतने के आरोप पर विभाग ने जांच बिठा दी है। युवा सेवा एवं खेल विभाग मंत्री यादवेंद्र गोमा ने विभाग को इसकी जांच के निर्देश दिए।
मंत्री के आदेशों के बाद विभाग ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में अतिरिक्त निदेशक युवा सेवा एवं खेल विभाग को अध्यक्ष बनाया गया है। जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी (मुख्यालय) और विभाग के वरिष्ठ कबड्डी कोच को सदस्य नामित किया गया है।
कमेटी को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें, प्रीत सिंह चंदेल और संजीव कुमार ने इसकी शिकायत भेजी थी। जिला सोलन कबड्डी संघ के पदाधिकारियों ने भी शिकायत का समर्थन किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सीनियर नेशनल कबड्डी टीम के चयन में निर्धारित मानकों की अवहेलना की है। चयन में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
अब जांच कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह शिकायत की बिंदुवार जांच करे। टीम चयन से जुड़े अभिलेखों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा करे। शिकायतकर्ताओं, चयनकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच है। रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को जांच में पूर्ण सहयोग देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
15 फरवरी से बैठे हैं अनशन पर
प्रीत सिंह चंदेल और संजीव कुमार नालागढ़ में युवाओं के साथ अनशन पर बैठे हैं। शिकायत पत्र में गांव रोतावाला निवासी पूर्व कप्तान प्रीत सिंह चंदेल और गांव बरूणा निवासी राष्ट्रीय खिलाड़ी संजीव कुमार सहित अन्य खिलाडियों ने आरोप लगाया है कि सीनियर नेशनल कबड्डी कैंप टीम के चयन में उनके प्रदर्शन को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
खिलाड़ियों का कहना है कि प्रीत सिंह चंदेल हिमाचल प्रदेश कबड्डी टीम के कप्तान रह चुके हैं, जबकि संजीव कुमार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं और बीच कबड्डी नेशनल के लिए भारत के कैंप में भाग ले चुके हैं। इनके सबसे ज्यादा प्वाइंट थे, बावजूद इसके उन्हें बाहर किया गया है। जबकि अन्य खिलाड़ी जिनका प्रदर्शन खराब था उन्हें चयनित कर लिया गया है। एक खिलाड़ी की हालत खराब है और उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है।
इससे पहले इन खिलाड़ियों ने 11 फरवरी को ही एसडीएम नालागढ़ को लिखित शिकायत देकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, लेकिन कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, ट्रायल के दौरान हुए मैचों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच, सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन का पुनर्मूल्यांकन व ट्रायल दोबारा करवाने की मांग उठाई है।
खिलाड़ियों ने यह भी मांग रखी है कि दोबारा ट्रायल लाइव व पारदर्शी तरीके से आयोजित किए जाएं और इसकी देखरेख किसी वरिष्ठ खेल अधिकारी की निगरानी में हो ताकी कोई विवाद भविष्य में न हो।
