लखनऊ। श्रमिकों को पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार मां अन्नपूर्णा भोजन योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत जरूरतमंदों को सुबह और शाम भोजन की थाली दी जाएगी। लाभार्थियों के चयन की नीति तैयार की जा रही है।
प्रारंभिक तौर पर श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों और घरेलू कामगारों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। पात्रता की शर्तें तय होने के बाद जनवरी से पहले चरण में 12 जिलों में रसोई शुरू होने की संभावना है।
योजना के तहत पांच रुपये की थाली में दाल, दो सब्जियां, चार रोटियां, एक छोटी कटोरी चावल, अचार और एक मिठाई शामिल होगी। पहले चरण में कानपुर, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, अयोध्या, शाहजहांपुर और रायबरेली में रसोई शुरू करने की तैयारी है। योजना के संचालन के लिए शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। अब भोजन तैयार करने और वितरण की व्यवस्था के लिए कार्यदायी संस्था का चयन किया जाएगा।
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि योजना के लाभार्थियों के चयन की नीति बनाई जा रही है। श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। पहले चरण में प्रत्येक रसोई केंद्र पर सुबह और शाम अलग-अलग एक-एक हजार लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। बाद में योजना का विस्तार भी किया जाएगा।
कई राज्यों में पहले से चल रही सस्ती भोजन योजनाएं
गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए कई राज्य पहले ही ऐसी योजना हैं। तमिलनाडु में वर्ष 2013 में जयललिता सरकार ने अम्मा कैंटीन शुरू की थी। तेलंगाना में 2014 में के. चंद्रशेखर राव सरकार ने पांच रुपये वाली अन्नपूर्णा कैंटीन शुरू की।
ओडिशा में 2015 में नवीन पटनायक सरकार ने पांच रुपये वाली आहार योजना शुरू की। तभी उत्तराखंड सरकार ने इंदिरा अम्मा भोजनालय शुरू किया, जहां मैदानी क्षेत्रों में 20 और पर्वतीय क्षेत्रों में 25 रुपये प्रति थाली लिए जाते थे। राजस्थान में 2016 में वसुंधरा राजे सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई शुरू की।
मध्य प्रदेश में 2017 में शिवराज सिंह चौहान सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय रसोई और कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने इंदिरा कैंटीन शुरू की। इन योजनाओं में पांच से 10 रुपये तक में भोजन उपलब्ध कराया गया।
