लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि होमगार्डों को तेजी से बदलती तकनीक और नई चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाये। ताकि वह चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सके। पीड़ित, जरूरतमंद व्यक्ति का होमगार्ड जवान और पुलिस सबसे पहले सामना होता है। वह फर्स्र्ट रिस्पांडर ( पहली प्रतिक्रिया) होता है।
आपदा राहत, भीड़ प्रबंधन, चुनाव, सेवा और जागरूकता अभियानों में उसकी भूमिका है। ऐसे में बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और तकनीकी सशक्तिकरण से होमगार्ड संगठन की कार्यक्षमता को और बढ़ाया जाना चाहिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिसिसटेशन) व प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाये। चिकित्सा में गोल्डन आवर का महत्व बताया जाये। वर्ष 1963 में स्थापित होमगार्ड संगठन में 1,18,348 पद स्वीकृत हैं।
अभी 67,971 होमगार्ड उपलब्ध हैं। इनमें से आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में 3,812 होमगार्डों को ‘आपदा मित्र’ बनाया गया है। 1,091 होमगार्डो को अग्नि बचाव और 425 को बाढ़ बचाव का प्रशिक्षण दिया गया है।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य होमगार्ड्स एनरोलमेंट मार्गदर्शिका के अंतर्गत 41,424 रिक्त पदों की लिखित परीक्षा अप्रैल 2026 में हुई थी। अंतिम परिणाम सितंबर 2026 तक घोषित हो जायेंगे। चयनित अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में 90 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा होमगार्डो को डिजिटल प्रणालियों का अधिकतम उपयोग करना सिखाया जाये। उनका प्रशिक्षण भत्ता 260 प्रतिदिन से बढ़ाकर ड्यूटी भत्ते के समकक्ष कर दिया गया है। प्रत्येक तीन वर्ष में 3,000 वर्दी भत्ता देने की व्यवस्था है।
बैठक में बताया गया कि मौजूदा समय में 104.80 करोड़ की लागत से स्वीकृत 20 निर्माण परियोजनाओं का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि होमगार्ड और उनके परिवारों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता पर है।
सेवाकाल में मृत्यु की स्थिति में नामित आश्रित को पांच लाख की अनुग्रह राशि दी जाती है। दिसंबर 2020 से अब तक 3,153 मामलों में 157.65 करोड़ की अनुग्रह राशि दी गयी है।
अप्रैल 2022 से अब तक 125 दिवंगत होमगार्डो के आश्रितों को विभिन्न बैंकिंग बीमा योजनाओं के माध्यम से 30 लाख से 45 लाख तक की सहायता दिलायी गयी है। अंतरजनपदीय संचरण की स्थिति में देय दैनिक भोजन भत्ता 30 से बढ़ाकर 120 प्रतिदिन किया गया है।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान को राज्य स्तरीय अत्याधुनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है।
इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, आधुनिक परेड ग्राउंड, ड्रिल क्षेत्र, फिजिकल ट्रेनिंग एवं आब्स्टेकल कोर्स, आधुनिक छात्रावास, भोजनालय, डिजिटल पुस्तकालय, डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म तथा सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित होनी है।
