उरई। उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा गया छह पन्नों का पत्र प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। वर्तमान में एसडीएम (न्यायिक) के पद पर तैनात राही ने अपने पत्र में कार्यप्रणाली, पोस्टिंग और प्रशासनिक निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि उन्हें पूरे दिन का काम नहीं मिल रहा है तो सरकार उन्हें आधी तनख्वाह दे दे। या फिर ऐसी जगह तैनात करे जहां वे कानून और नियमों के अनुसार पूरी क्षमता से काम कर सकें।
आईएएस रिंकू सिंह की चिट्ठी से साफ है कि सरकारी सिस्टम में ईमानदारी से काम करना कितना मुश्किल है। उन्होंने लिखा कि जनता दर्शन में डीएम साहब के साथ बैठना होता है.. हालांकि, डीएम साहब शिकायतों के निस्तारण का दिखावा ही करते हैं जिससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है.. इसलिए डीएम साहब के साथ जनता दर्शन में समय गुजारना खुद को धोखा देना है। हालांकि आईएएस रिंकू सिंह ने कहा कि उन्होंने शासन को पत्र लिखा है जिस व्यवस्था से वह संतुष्ट नहीं है उसका जिक्र किया है।
जालौन में एसडीएम के पद पर मिली थी तैनाती
बिना काम के वेतन लेने को नियम के विपरीत बताकर भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने वाले आईएएस रिंकू सिंह राही को पांच मई को जालौन में बतौर एसडीएम के पद पर तैनाती मिली थी। वह तैनाती क्षेत्र में महज 56 दिन ही रहे। इस बीच लेखपालों, वकीलों, शिक्षकों, कर्मचारियों ने उन पर अभद्रता करने के आरोप लगाए। तैनाती के दिनों में ही उनका विवाद ब्लाक प्रमुख रामराजा निरंजन से भी हुआ। जिसके बाद उनको जालौन से हटाकर एसडीएम न्यायिक उरई के पद पर तैनात कर दिया गया।
ये लिखा चिट्ठी में
इससे क्षुब्ध होकर आईएएस रिंकू सिंह राही ने नियुक्ति व कार्मिक विभाग को भेजे पत्र में लिखा है कि वर्तमान पद पर उन्हें प्रतिदिन लगभग चार घंटे ही कार्य मिलता है। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वह अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में यदि सरकार उनका वेतन आधा कर दे या फिर उन्हें ऐसा दायित्व दिया जाए जहां वे जनहित और कानून के अनुरूप प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
दूसरे राज्य भेजने तक का किया अनुरोध
राही ने पत्र में कहा है कि यदि उत्तर प्रदेश में उनके लिए ऐसी कोई उपयुक्त तैनाती उपलब्ध नहीं है, जहां वे स्वतंत्र और नियमों के अनुसार कार्य कर सकें, तो उन्हें प्रतिनियुक्ति पर किसी अन्य राज्य में भेजने पर भी विचार किया जाए।
मंत्री और विधायक का भी किया उल्लेख
अपने पत्र में आईएएस अधिकारी ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री व जिले के एक भाजपा विधायक के नाम का भी उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि जालौन में एसडीएम के रूप में कार्यरत रहने के दौरान कुछ अवैध कब्जों और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए। कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि यह सभी आरोप आईएएस अधिकारी द्वारा अपने पत्र में लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या खंडन संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और जांच के बाद ही संभव होगा।
कोल्ड स्टोरेज जांच के बाद तबादले का दावा
पत्र में रिंकू सिंह राही ने अपने तबादले का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि लखनऊ अग्निकांड के बाद जालौन में एसडीएम रहते हुए उन्होंने एक कोल्ड स्टोरेज की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराई थी। माक ड्रिल के दौरान आग बुझाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली और संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। उनका दावा है कि इस मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही उनका तबादला एसडीएम (न्यायिक) के पद पर कर दिया गया।
कानून के अनुसार काम करने का अवसर मांगा
पत्र के अंत में आईएएस अधिकारी ने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें जालौन की किसी अन्य तहसील, किसी दूसरे जिले अथवा ऐसी जगह तैनात किया जाए, जहां वे बिना किसी दबाव के कानून और नियमों के अनुसार कार्य कर सकें। यदि यह उत्तर प्रदेश में संभव न हो तो दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति पर भेजने पर विचार किया जाए।
हर व्यवस्था पर उठाए सवाल
रिंकू सिंह राही ने लिखा कि आम जनता के हित और सरकारी कामों की निरंतरता के लिए कई मौकों पर व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के प्रतिकूल व्यावहारिक संतुलन अपनाने का प्रयास किया.. विधायक गौरी शंकर वर्मा के सामने डीएम ने आदेश दिया कि तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामले में कोई कार्रवाई न की जाए। जब शिकायतें बढ़ीं तो सभी का फर्जी निस्तारण होने लगा।
इस वजह से तबादला
जिले की रैंक ऊपर रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू माफिया के मामलों का फर्जी निस्तारण कराया गया। कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लाक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद किया जिसके चलते उनका तबादला कर दिया गया। रिंकू सिंह ने डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली है। उन्होंने लिखा कि डीएम साहब ने मुझे एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात किया है, अगर मुझसे कोई गलती हुई हो.. जिसके लिए मैं जिम्मेदार हूं तो मुझे नियमानुसार दंडित किया जाए।
शासन को पत्र भेजा है। अवैध कब्जों की सही जांच न हो सके इसलिए उन्हें वहां से हटाया गया है। इस संबंध में शासन को पत्र भेजकर सिर्फ अनुरोध किया है कि उनको स्वछंद रूप से कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। सुशासन के तहत कार्य हो उनकी यह इच्छा है।
रिंकू सिंह राही, आईएएस
