शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पानी पर 50 परसेंट रॉयल्टी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट की गैर-मौजूदगी में राज्य आत्मनिर्भर बन सकेगा।
गौरतलब है कि केंद्र ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश समेत कुछ राज्यों को रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने की घोषणा की थी। RDG वे फंड होते हैं, जो केंद्र राज्यों को उनके रेवेन्यू अकाउंट में गैप को भरने के लिए जारी करता है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कहा है कि अगर केंद्र सरकार राज्य की संपत्ति ‘पानी’ पर 50 परसेंट रॉयल्टी देने को तैयार है, तो हमें RDG की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन, नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVNL) जैसी PSU मिनी नवरत्न कंपनियां बन गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस साल SJVNL का बजट 67,000 रुपये था, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार का बजट 58,000 करोड़ रुपये था। हिमाचल प्रदेश को इन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से होने वाले प्रॉफिट का कम से कम आधा हिस्सा मिलना चाहिए, क्योंकि ये राज्य का पानी मुफ्त में इस्तेमाल करते हैं; बदले में, यह फंड राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फिर भी, संविधान का आर्टिकल 275 (1) उन राज्यों को RDG जारी करने का प्राविधान करता है, जो अपनी कमाई और खर्च के बीच के अंतर को कम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि RDG हिमाचल प्रदेश के लोगों का अधिकार है। उन्होंने ने कहा, “हम एक कोऑपरेटिव फेडरल स्ट्रक्चर में रहते हैं; हमें अपना मामला रखने का अधिकार है। मैं इस बात से दुखी हूं कि राज्य में बीजेपी हिमाचल विरोधी है।”
मिडिल-ईस्ट में चल रहे संकट के बीच फंसे हिमाचली प्रवासियों के बारे में उन्होंने कहा कि चीफ सेक्रेटरी को खाड़ी देशों में राज्य के लोगों को हर संभव मदद देने और अगर वे चाहें तो उनकी वापसी में मदद करने का निर्देश दिया गया है।
