शिमला। हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव में भाजपा के लिए अपने भी चुनौती बने हुए हैं। सोलन में नौ, मंडी में तीन व धर्मशाला नगर निगम में टिकट कटने से नाराज दो भाजपा नेता निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे हैं। धर्मशाला में पूर्व महापौर और पूर्व उपमहापौर दोनों के टिकट कटने के कारण वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
अगर ये लोग नहीं माने तो भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डा. राजीव बिंदल का कहना है कि नाराज नेताओं को मना लिया जाएगा।
तीन जगह अंदरूनी विरोध
पार्टी की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कई स्थानों पर नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर पर सोलन, मंडी और धर्मशाला नगर निगम क्षेत्रों में पार्टी को अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों की 64 सीट पर चुनाव होने हैं और भाजपा ने सभी सीट पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। कई नेताओं ने टिकट न मिलने पर खुलकर नाराजगी जताई है। इनमें से कई नेता अब निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।
नगर निगम सोलन के नौ वार्डों में भाजपा के विरुद्ध बगावती उम्मीदवार मैदान में हैं। नगर निगम मंडी में तीन और धर्मशाला में दो वार्डों में भी पार्टी को विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है।
रूठे नहीं मनाए तो चुनाव प्रदर्शन पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते नाराज नेताओं को नहीं मनाया तो इसका सीधा असर भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आने वाले दो दिन में भाजपा के बड़े नेता और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मोर्चा संभालेंगे। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास किया जाएगा।
विपक्षी दलों को लाभ पहुंचा सकती है अंदरूनी कलह
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि नगर निगम चुनाव में संगठनात्मक एकता बेहद महत्वपूर्ण होती है और अंदरूनी कलह विपक्ष को लाभ पहुंचा सकती है। यही वजह है कि पार्टी अब डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। विपक्षी दल भी भाजपा की इस अंदरूनी खींचतान पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस और अन्य दलों को उम्मीद है कि भाजपा में जारी असंतोष का लाभ उन्हें चुनाव में मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा के लिए बागियों को मनाना बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
