लखनऊ। राजधानी में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने और प्रतिबंधित मार्गों पर उनके संचालन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि लखनऊ की सड़कों पर लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शों का संचालन यातायात जाम का मुख्य कारण है। ऐसे में इनकी संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होने पर नए पंजीकरण रोकने की जरूरत है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को नियत की है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन की ओरसे दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। न्यायालय ने राज्यसरकार को निर्देश दिया है कि यदि लखनऊ अथवा प्रदेश के किसी अन्य शहर में ई-रिक्शों की संख्या आवश्यकता से अधिक है तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाए। न्यायालय ने इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है।
ई-रिक्शों के पंजीकरण के लिए अनिवार्य व्यवस्था जरूरी
न्यायालय ने कहा कि ई-रिक्शों के पंजीकरण के लिए अनिवार्य व्यवस्था का पालन जरूरी है। सुनवायी के दौरान कोर्ट के सामने आया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को ई-रिक्शा पंजीकरण के मुददे पर जो जानकारी दी है उससे स्पष्ट है कि केंद्र ने सिर्फ पंजीकरण शुल्क में छूट की बात कही है, लेकिन मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त करने की बात नहीं की गई है इसलिए बिना वैध पंजीकरण के ई-रिक्शों का संचालन स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने मोटर वाहन नियमावली, 1998 के नियम 178 के तहत ई-रिक्शों के संचालन को नियंत्रित करने की राज्य सरकार की शक्ति का भी उल्लेख किया। इस संबंध में 12 मई 2022 का आदेश पहले से लागू है,जिसके तहत राजधानी के कई मार्गों पर ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
नागरिकों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित करे सरकार
खंडपीठ ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। लिहाजा विशेष जांच दल (एसआइटी) कोआदेश का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एसआइटी को पूर्वआदेश की समीक्षा कर अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी प्रतिबंध लागू करने पर विचार करने को कहा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध लगाते समय वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किए जाए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो। इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने कानिर्देश दिया गया है। वहीं इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि कमता चौराहे और पॉलीटेक्निक-कमता-चिनहट मार्ग पर यातायात की समस्या का स्थायी और दीर्घकालीन समाधान आवश्यक है। न्यायालय के सामने आया कि आईआईटी बीएचयू यातायात के बहुदिशीय प्रवाह, यातायात अनुकरण अध्ययन तथातकनीकी और वित्तीय प्रस्तावों का स्वतंत्र मूल्यांकन करेगा और इसके आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
चाइनीज मांझा पर रोक को लेकर प्रभावी कदम न उठाने पर हाईकोर्ट नाराज
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चाइनीज मांझा को लेकर राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई प्रभावी न उठाए जाने पर नाराजगी जताई है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 नवंबर की तिथि नियत करते हुए यह भी निर्देश दिया है कि याचिका को अगली सुनवाई पर पहले केस के तौर पर प्रस्तुत किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर पारित किया। वहीं राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को जानकारी दी गई कि ऐसे मांझे की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए प्रावधान बनाए जा रहे हैं।
