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Home » Blog » महाकुंभ वाली हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, बोलीं- मेरे चरित्र पर सवाल उठाना आसान, ‘मैं सीता नहीं, जो हर बार अग्निपरीक्षा दूं
उत्तर प्रदेशराज्य

महाकुंभ वाली हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, बोलीं- मेरे चरित्र पर सवाल उठाना आसान, ‘मैं सीता नहीं, जो हर बार अग्निपरीक्षा दूं

lokmatujala
Last updated: January 13, 2026 10:30 am
By lokmatujala
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10 Min Read
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प्रयागराज: महाकुंभ-2025 से चर्चा में आईं मॉडल, एंकर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ने का ऐलान किया है. अपने इंस्टा एकाउंट से जारी एक वीडियो संदेश में इसका ऐलान किया. इसमें उन्होंने कहा है कि, बीते एक साल से लगातार विरोध का सामना किया है. मानसिक दबाव और आरोपों ने मुझे भीतर से तोड़ दिया है. अब मौनी अमावस्या के बाद मैं अपने पुराने पेशे में लौटूंगी. कहा कि, मेरे चरित्र पर सवाल उठाए गए. मैं धर्म के मार्ग पर चलकर जो कुछ भी करने की कोशिश कर रही थी, उसपर सवाल उठाए गए, विरोध किया गया. मैं सीता नहीं हूं, जो हर बार अग्नि परीक्षा दूं.

चोरी-चकारी नहीं कर रही थी, मेरा मनोबल तोड़ा: हर्षा ने अपने वीडियो की शुरुआत जय श्री राम से की. कहा-‘प्रयागराज महाकुंभ-2025 से शुरू हुई यह कहानी अब खत्म हो रही है. इस 1 साल में मैंने बहुत सारी दिक्कतों का सामना किया. प्रयागराज से शुरू हुआ यह विरोध लगा कि महाकुंभ के बाद ठीक होगा, लेकिन मैंने जो कुछ भी करने की कोशिश की, धर्म के रास्ते पर चलते हुए, उसका विरोध हुआ. मैं क्या कर रही थी ? मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी. मैं चोरी चकारी नहीं कर रही थी. लूटपाट नहीं कर रही थी. बलात्कार नहीं कर रही थी, लेकिन धर्म के रास्ते पर चलते हुए जो कुछ भी कर रही थी, उसे बार-बार रोका गया. मेरा मनोबल बार-बार तोड़ा गया.

बहुत उधारी में हूं, आज कोई साथ नहीं : हर्षा ने आगे कहा-‘जिन लोगों को लगता है कि धर्म को धंधा बनाकर मैं करोड़ों रुपए छाप लिए, मैं आज बहुत उधारी में हूं. धर्म में आने से पहले जब मैं एंकरिंग कर रही थी तो मैं एक प्राऊडी एंकर थी. मैं बहुत गर्व से बोलती हूं कि मेरा प्रोफेशन बहुत अच्छा था. मैं बहुत अच्छा कर रही थी. देश से ज्यादा विदेश में काम करके मैं अच्छा खासा पैसा कमा रही थी. मैं उसमें रहकर बहुत खुश थी. यहां आने के बाद उधारी के अलावा कुछ नहीं बचा मेरे साथ. सबसे बड़ी बात किसी का साथ भी नहीं है. आज मैं यह सब क्यों आपको बोल रही हूं, क्योंकि लगातार 1 साल में जो कुछ भी काम करने का प्रयास किया है, उसे रोका गया है. उसे तोड़ा गया है. उसमें विरोध उत्पन्न किए गए और यही चीज इस बार माघ मेले में भी हुई है, जिसकी वजह से मैं ज्यादा आहत हूं.’

मौनी अमावस्या पर स्नान के साथ धर्म की राह छोड़ूंगी: हर्षा ने कहा-‘मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसके नाते मेरा विरोध किया जाए. विरोध करना शायद मेरे देश में यही एक चीज सबसे आसान है एक लड़की के साथ. अगर आप उसका मनोबल नहीं तोड़ पा रहे हो उसका चरित्र हनन करो, तब तो वह टूटेगी ही. तो भाई आप अपना धर्म अपने पास रखिए. मैं कोई मां सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूंगी. एक साल से जितनी परीक्षाएं देनी थीं, जितना कुछ करना था, मैंने कर लिया. अब बस बहुत हुआ. इस मौनी अमावस्या पर माघ मेले में मैं अपना स्नान करूंगी और उस स्नान के साथ, जो धर्म पर चलने का संकल्प मैंने लिया था, उस संकल्प को मैं विराम दूंगी और वापस अपना पुराना काम करूंगी. जिसमें न ही कोई विरोध था, न ही कोई चरित्र हनन जैसा काम था और न ही उधारी थी.’

सबसे बड़ा धर्म फैमिली: हर्षा ने आखिर में कहा-‘ मुझसे अब कोई भी युवा, कोई भी भाई–बहन यह बोलेंगे कि मुझे धर्म से जुड़ना है तो मैं उनको यही बोलूंगी कि सबसे बड़ा धर्म है अपनी फैमिली से जुड़कर रहो. अपने परिवार में रहो. अपने घर के मंदिर में पूजा करो. इसके अलावा किसी को मत मानो. मेरा इस धर्म से जाना सिर्फ धर्म से जाना नहीं होगा, बल्कि एक विद्रोही मानसिकता लेकर जाना होगा. जय श्री राम.

महाकुंभ में आईं थी चर्चा में: बता दें कि हर्षा इन दिनों प्रयागराज के माघ मेले में मौजूद हैं और इस बार अपने भाई दीपक के साथ आई हैं. महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान साध्वी वेशभूषा में रथ पर नजर आने के बाद हर्षा अचानक सुर्खियों में आई थीं. मॉडल, एंकर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रहीं हर्षा के साध्वी रूप पर संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी. विवाद बढ़ने पर उन्होंने महाकुंभ बीच में ही छोड़ दिया था. इसके बाद 14 अप्रैल से वृंदावन से पदयात्रा शुरू की थी, जिसका समापन 21 अप्रैल को संभल में हुआ था. हर्षा ने हिंदू समाज के लिए काम करने की बात कही थी.

कौन हैं हर्षा, जानिए: हर्षा मूल रूप से झांसी की रहने वाली हैं. उनके पिता दिनेश बस कंडक्टर और मां किरण बुटीक चलाती हैं. उनका परिवार वर्तमान में भोपाल में रह रहा है. हर्षा संन्यास का रास्ता अपनाने के बाद उत्तराखंड में निवास कर रही थीं. वह आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि की शिष्या रही हैं. महाकुंभ से पहले इंस्टाग्राम पर उनके करीब 6.67 लाख फॉलोअर्स थे. 14 जनवरी 2025 को एक ही दिन में यह संख्या 10 लाख के पार पहुंच गई थी. महाकुंभ समाप्त होते-होते उनके फॉलोअर्स 15 लाख हो गए और फिलहाल यह आंकड़ा करीब 17 लाख के आसपास है.

कब-कब आईं चर्चा में

1. साधु-संतों ने इस वजह से निशाने पर लिया

महाकुम्भ 2025 में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी के रथ पर सवार होने की वजह से भी हर्षा चर्चा में आईं. हर्षा रिछारिया को जहां कुछ साधु-संतों ने निशाने पर लिया, वहीं 16 जनवरी को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने उनका समर्थन किया. हर्षा को उत्तराखंड की बेटी बताया. तब कहा कि उन्हें संन्यासी बनना है या शादी करनी है, या फिर जीवन में कुछ और करना है तो फैसला उन्हें ही करने दिया जाए. किसी और को उसके जीवन के बारे में टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है. उनका अखाड़ा हर्षा और उनके फैसले के साथ है.

2. महाकुंभ से जाने का फैसला टाला

महाकुंभ 2025 के दौरान ही जनवरी में हर्षा रिछरिया ने प्रयागराज से जाने का फैसला ले लिया था. लेकिन, बाद में उन्होंने महाकुंभ छोड़कर नहीं जाने का ऐलान किया. कहा कि वे पूरे 45 दिन तक मेला क्षेत्र में रहेंगी और साधु-संतों की सेवा करेंगी. उन्होंने यह फैसला निरंजनी अखाड़े में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पूरी से आशीर्वाद लेने के बाद लिया. इस दौरान रविन्द्र पूरी महाराज को पिता तुल्य बताया था. कहा था कि उनके ही कहने पर उन्होंने महाकुंभ न छोड़ने का फैसला लिया.

3. दोस्त ने उठाए थे सवाल

महाकुंभ के दौरान हर्षा हमेशा चर्चा में रहीं. इस बीच 24 जनवरी को हर्षा के करीबी मित्र बताए जा रहे दीपक सारस्वत के कुछ दावों ने संन्यास पर सवाल उठाए. ग्वालियर निवासी दीपक अचानक कुंभ में पहुंचे. दीपक का कहना था कि हर्षा इस पूरे प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रही हैं. वह खुद को सनातनी बताकर बिग बॉस या फिर किसी बड़े सीरियल या फिल्म में काम करने के लिए खुद को फेमस कर रहीं हैं. यह भी कहा था कि भगवा वस्त्र पहनकर टीका लगाकर साधु-संतों के साथ बैठकर ऐसी-ऐसी बातें करना उनकी पर्सनालिटी को सूट नहीं कर रही हैं.

4. सनातन की अलख जगाने संभल पहुंचीं

महाकुंभ के बाद भी हर्षा काफी सक्रिय रहीं. 16 मार्च 2025 को वे संभल पहुंचीं. विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय में सनातनी भाई-बहनों को तिलक किया और मिठाई खिलाई. तब हर्षा रिछारिया ने कहा था कि यहां इतने तीर्थ हैं, जो हमें अब पता चले. अब भी संभल के बारे में जिन्हें पता नहीं है, उनको हम यहां की जानकारी पहुंचाएंगे. बताएंगे कि संभल क्या है और यह कहां है?

5. हिंदू संस्कृति को जागृत करने के लिए पदयात्रा का ऐलान

10 अप्रैल 2025 को हर्षा वृंदावन पहुंचीं. बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने के बाद अटला चुंगी स्थित राम मंदिर में भोलेनाथ का अभिषेक किया. वहीं प्रेस वार्ता में ऐलान किया कि कि सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति को जागृत करने के लिए 14 अप्रैल से वृंदावन से पदयात्रा शुरू करेंगी. 21 अप्रैल को संभल में यात्रा का समापन होगा. आठ दिन की यात्रा 175 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. हर्षा ने यात्रा पूरी भी की.

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