गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी समेत दो शस्त्र लिपिकों के खिलाफ शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग में बुधवार को मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, माफिया मुख्तार अंसारी के आईएस-191 गैंग के शस्त्र लाइसेंस की कई फाइलें डीएम आफिस से गायब हो गई हैं।
शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग में गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी समेत तत्कालीन दो शस्त्र लिपिकों के खिलाफ शहर कोतवाली में बुधवार को मुकदमा दर्ज किया गया है। डीआईजी रेंज वैभव कृष्ण के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई थी।
एसपी डॉ. ईरज राजा ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि जांच में सांसद अफजाल अंसारी को जारी लाइसेंस संख्या 1188 पी-2 से संबंधित पत्रावली और खरीद-बिक्री से जुड़ी पत्रावली गायब मिली है। इस लाइसेंस पर खरीदी गई राइफल संख्या 830405 की वर्तमान स्थिति का भी पता नहीं चल सका। शहर कोतवाल प्रमोद सिंह की तहरीर पर आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं में सांसद अफजाल अंसारी, तत्कालीन प्रथम शस्त्र लिपिक असफाक अहमद और द्वितीय शस्त्र लिपिक गौरी शंकर राम के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों का सत्यापन अभी जारी है।
मुख्तार गैंग के शस्त्र लाइसेंस की कई फाइलें गायब
माफिया मुख्तार अंसारी के आईएस-191 गैंग के शस्त्र लाइसेंस की कई फाइलें डीएम आफिस से गायब हो गई हैं। जांच में सामने आया है कि लाइसेंसी हथियारों की खरीद-बिक्री से संबंधित मूल पत्रावलियां अभिलेखागार से साजिश के तहत गायब कर दी गईं है, ताकि असलहों के दुरुपयोग को छिपाया जा सके। इतना ही नहीं गैंग के सदस्यों ने असलहे खरीदने के बाद कागजों पर उन्हें दूसरे लोगों को बेच दिया, लेकिन उनका इस्तेमाल खुद करते रहे।
पुलिस कार्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान एसपी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि डीआईजी रेंज वैभव कृष्ण के निर्देश पर आईएस-191 गैंग के सदस्यों और सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों का भौतिक सत्यापन कराया गया। अपर पुलिस अधीक्षक नगर और ग्रामीण के नेतृत्व में गठित टीमों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश में जाकर जिलाधिकारी कार्यालयों और लाइसेंसी दुकानों के अभिलेख खंगाले। जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्यों को जारी कुल 51 शस्त्र लाइसेंसों पर 145 हथियारों की खरीद-बिक्री हुई थी। सत्यापन के दौरान कई पत्रावलियां और क्रय-विक्रय से संबंधित दस्तावेज जिलाधिकारी कार्यालय के अभिलेखागार में नहीं मिले। कुछ हथियारों की वर्तमान स्थिति का भी पता नहीं चल सका।
साजिश के तहत गायब कराई गईं मूल पत्रावलियां
एसपी के अनुसार ने कहा कि तत्कालीन शस्त्र लिपिकों ने आईएस-191 गैंग के सदस्यों के आपराधिक प्रभाव में आकर साजिश के तहत लाइसेंस और क्रय-विक्रय से संबंधित मूल पत्रावलियां जिलाधिकारी कार्यालय से गायब कराईं, ताकि इन हथियारों का इस्तेमाल आईएस-191 गैंग के सदस्य अपराध में कर सकें और इसका पता न चल सके।
