शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए निगम अब एक और बड़ा बदलाव करने जा रहा है। आधे टिकट पर यात्रा यदि कोई करता है तो उसे अपनी आयु का प्रमाण पत्र दिखाना पड़ सकता है। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम इसमें बदलाव करने जा रहा है।
आए दिन परिचालकों की बच्चों के अभिभावकों के साथ होने वाली कहासुनी व विवाद से निपटने के लिए यह निर्णय ले सकता है। शनिवार को हिमाचल प्रदेश परिचालक संघ की निगम प्रबंधन के साथ आयोजित बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई।
विस्तृत गाइडलाइन जारी होगी
अभी बैठक में यह निर्णय लिया है। निगम प्रबंधन इसको लेकर जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा। निर्णय लेने से पहले उप मुख्यमंत्री के साथ भी चर्चा की जाएगी। यदि जरूरी हुआ तो इसे निदेशक मंडल (बीओडी) में रखा जा सकता है। एचआरटीसी बसों में 0 से 5 साल से कम बच्चों का किराया नहीं लगता। 5 से 12 साल तक आयु वालों का आधा किराया लगता है।
परिचालकों का रहता है तर्क
परिचालकों का तर्क है कि कई बार बच्चों की उम्र 5 से अधिक होती है और अभिभावक गलत उम्र बताते हैं। कई बार बच्चा 12 साल से ज्यादा होता है उसकी की कम उम्र बताई जाती है। नियम स्पष्ट नहीं है इसलिए वह आयु प्रूफ भी नहीं मांग सकते। चैकिंग के दौरान उल्टा परिचालकों पर कार्रवाई होती है।
निगम के प्रबंध निदेशक डा. निपुण जिंदल ने कहा कि इसको लेकर जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। बैठक में परिचालक यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष प्रीत महेंद्र व महासचिव दिपेंदर कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
जल्द दूर होगी वेतन विसंगति
बैठक में परिचालकों के वेतन विसंगति मामले पर चर्चा हुई। परिचालक यूनियन के अध्यक्ष प्रीत महेंद्र ने कहा कि परिचालक कोर्ट से भी इस संबंध में केस जीत चुके हैं। ऐसे में वेतन की विसंगति को जल्द दूर किया जाए। प्रबंध निदेशक ने आश्वस्त किया यह मामला सरकार को भेजा जाएगा और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। प्रबंध निदेशक ने यूनियन पदाधिकारियों को आश्वस्त किया की परिचालकों की मांगों को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
रात्रि भत्ते की देनदारी होगी दूर, फ्रंट सीट परिचालक को होगी आरक्षित
बैठक में परिचालकों के रात्रि समय भत्ते दिए जाने की मांग को भी प्रमुखता से रखा। इस पर भी निगम प्रबंध निदेशक से आश्वस्त किया कि वित्तीय स्थिति सही न होने के कारण नाइट ओवर टाइम समय पर नहीं दिया जा पा रहा है। अप्रैल से इससे नियमित दिए जाने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक के बाद कंडक्टर यूनियन के अध्यक्ष प्रीत मेंहद्र ने पत्रकारों वे बातचीत में कहा कि लंबी दूरी के रूटों पर परिचालकों को अंतिम सीट पर बैठना पड़ता है। पहले उन्हें फ्रंट सीट दी जाती थी। परिचालकों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ रही हैं। लांग रूट में चलने वाले परिचालकों को फ्रंट सीट आरक्षित करने पर जल्द निर्णय होगा।
