पालमपुर। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर का 17वां दीक्षा समारोह विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित किया गया। समारोह में प्रदेश सरकार के कृषि सचिव सी. पालरासु ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम में कुलपति डा. एके पांडा, कुलसचिव डा. मधु चौधरी तथा अधिष्ठाता स्नातकोत्तर अध्ययन डा. जीडी शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे। दीक्षा समारोह के दौरान 638 डिग्री प्रदान की गईं, इनमें 504 एमएससी तथा 134 पीएचडी की डिग्री शामिल है।
दीक्षा समारोह में कुल 638 में से 257 विद्यार्थी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, इनमें 193 एमएससी एवं 64 पीएचडी शोधार्थी थे, जिन्होंने डिग्री प्राप्त की। मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए नौ स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। डाक्टरेट स्तर के स्वर्ण पदक विजेताओं में प्रवेश कुमार (2015-18), गौरव (2016-19), शिल्पा (2018-21) एवं नवनीत कौर (2019-22) शामिल रहे।
स्नातकोत्तर स्तर के स्वर्ण पदक विजेताओं में अंजली ठाकुर (2017-19), राहुल शर्मा (2018-20), शिवानी भदवाल (2019-21), नेहा राणा (2020-22) एवं आशीष शर्मा (2021-23) प्रमुख रहे। समारोह में पद्मश्री डा. पीएल गौतम तथा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों डा. एसके शर्मा, डा. केके कटोच, डा. एके सरियाल एवं डा. डीके वत्स सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थिति दर्ज की।
इसके अतिरिक्त डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन के कुलपति डा. राजेश्वर सिंह चंदेल तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलसचिव डा. एनके सांख्यान भी समारोह में शामिल हुए। विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल, सीनेट के सदस्य एवं विभागाध्यक्षों ने कुलसचिव के नेतृत्व में शैक्षणिक शोभायात्रा में भाग लिया।
अलग अलग क्षेत्रों में जाकर नाम कमाएंगे गोल्ड मेडलिस्ट
चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के 17वें दीक्षा समारोह में राष्ट्रपति का दौरा रद्द होने पर विवि कुलपति प्रो. डा. अशोक कुमार पांडा से सम्मान प्राप्त करने के बाद गोल्ड मेडलिस्ट अपने आप को गौरवांवित महसूस किया।
गोल्ड मेडलिस्ट का कहना है कि ये उनके लिए गौरव का पल था कि उन्होने देश के पहले नागरिक से सम्मानित होना था , लेकिन राष्ट्रपति का दौरा रद्द होने से कुलपति से सम्मान पाकर संतुष्ट हैं। वहीं ज्यादातर पीजी गोल्ड व पीएचडी मेडलिस्ट कृषि व पशुपालन क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं जबकि कुछेक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जनता की सेवा करना चाहते हैं।
गोल्ड मेडल हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की है। रोजाना इसके लिए समय निर्धारित किया था, तब कर सफलता मिली है। अब पशुपालन के क्षेत्र में पशुपालकों व छात्रों का मार्गदर्शन कर रहा हूं। सम्मान पाकर गौरव महसूस हो रहा है।
– डॉ. प्रवेश कुमार, गोल्ड मेडल पीएचडी।
शोधार्थी के रूप में गोल्ड मेडल हासिल करना गर्व का पल था। मेरे जीवन का ये बहुत सौभाग्य है। पीएचडी के बाद कृषि स्नातकों को शिक्षा दे रहा हूं। आगे भी इसी क्षेत्र में नाम कमाना चाहता हूं। इस दिशा में कार्यरत भी हूं।
– डॉ. गौरव, कृषि में पीएचडी।
मेरे लिए ये पल बहुत ही सौभाग्य की बात है कि मुझे गोल्ड मेडल ने सम्मानित किया है। कृषि में पीएचडी करके शैक्षणिक कार्य करूंगी। भविष्य को लेकर रुपरेखा तैयार की गई है उसके अनुरुप कार्य भी होगा।
– डॉ. शिल्पा, गोल्ड मेडल, पीएचडी।
मेरे लिए ये समय किसी सपने से कम नहीं है कि मुझ पीएचडी में गोल्ड मेडल हासिल हुआ है तथा कुलपति ने सम्मानित किया है। मैं निजी क्षेत्र में कार्य कर रही हूं और इसी क्षेत्र में आगे बढूंगी। निजी क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की कई संभावनाएं हैं।
– नवनीत कौर, गोल्ड मेडल, पीएचडी
मैं शोध के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाउंगी। इसीलिए मैंने कृषि विषय अपनाया है और मुझे सफलता भी मिली है। इसलिए इस क्षेत्र में आगे बढ़ना लक्ष्य है। शोध कार्य विकास की प्रगति में अहम हैं। इसके लिए निरंतर मेहनत भी जारी है।
– अंजली ठाकुर, गोल्ड मेडल, एमएससी।
मैं प्रशासनिक सेवा में आगे बढ़ना चाहता हूं। इसके लिए मैंने अभी से ही पढ़ाई को अधिक समय देना शुरू कर दिया है। गोल्ड मेडल मिलना सौभाग्य का फल है। कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।
– राहुल शर्मा, गोल्ड मेडल, एमएससी।
मेरा लक्ष्य कृषि में नई तकनीकें एवं शोध करना है। कृषि छोड़ चुके किसानों को प्रोत्साहित का पुनः कृषि की ओर मोड़ना ध्येय है। इसके लिए अभी से मेहनत कर रही हूं।
– शिवानी भड़वाल, गोल्ड मेडल, एमएससी कृषि।
कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सेवाएं दे रहा हो, लेकिन उसके लिए इससे बड़ा गौरवांवित करने का पल नहीं हो सकता, गोल्ड मेडल पाने के लिए खूब मेहनत की है। शोध कार्यों की दिशा में काम कर रहीं हूं।
– नेहा राणा, गोल्ड मेडल एमएसी कृषि।
मैं प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हूं, ताकि हर उस पात्र व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले, जोकि कई बार छूट जाते हैं, उसे लेकर काम करूं। इसके साथ ही पीएचडी की पढ़ाई भी करूंगी।
– आशिन शर्मा, गोल्ड मेडल, एमससी कृषि।
