शिमला। 16वें वित्तायोग की रिपोर्ट से पहाड़ी प्रदेश हिमाचल का अर्थ तंत्र प्रभावित हुआ है। वित्तायोग की रिपोर्ट में राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान देने की सिफारिश नहीं की गई है, यानी राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया गया है। इसके बंद होने से हिमाचल को पांच साल में 39127 करोड़ का झटका लगा है।
15वें वित्तायोग ने प्रदेश को पिछले पांच साल में 39127 करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान दिया था। जो कम था, लेकिन अब 16वें वित्तायोग ने इसे पूरी तरह से बंद कर दिया है। यानी आय और व्यय के अंतर की गैप फंडिंग केंद्र सरकार हिमाचल को करती थी, वह अब नहीं की जाएगी। इससे अगले पांच साल में हिमाचल के साथ कठिन आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
वित्तायोग की रिपोर्ट में स्थानीय निकायों के लिए वित्त पोषण और आपदा प्रबंधन के लिए मिलने वाली धनराशि में भी कमी हुई है।
यह संघीय ढांचे पर प्रहार : सीएम
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान बंद करने को संघीय ढांचे पर प्रहार बताया है। केंद्रीय बजट 2026-27 को हिमाचल के लिए निराशाजनक और अन्यायपूर्ण बताया है। यह बजट जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है।
सीएम ने पनगढ़िया और वित्त मंत्री से किया था आग्रह
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा 16वें वित्तायोग के अध्यक्ष डा. अरविंद पनगढ़िया से चार बार की गई मुलाकात में राजस्व घाटा अनुदान की धनराशि प्रति वर्ष 10-10 हजार करोड़ रखने का आग्रह किया गया था।
इसी तरह से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी राजस्व घाटा अनुदान और ऋण सीमा बढ़ाने को लेकर पक्ष रखा गया था। ऋण सीमा को बढ़ाकर चार प्रतिशत करने की मांग की गई थी।
अब तीन प्रतिशत ऋण का ही प्रविधान
प्रदेश सरकार को जीएसटीपी के तीन प्रतिशत ऋण के प्रविधान से ही संतोष करना होगा। जिन सात राज्यों को केन्द्र सरकार उनके खर्चों व आमदनी के गैप को पूरा करने के लिए अनुदान देती थी, वो भी अब नहीं मिलेगा।
केंद्रीय करों में जारी रखी हिस्सेदारी
वित्तायोग की रिपोर्ट ने जहां पर राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त किया है। वहीं, केंद्रीय करों में राज्य सरकार की हिस्सेदारी, शहरी निकाय एवं पंचायतीराज व आपदा राहत के लिए धनराशि को जारी रखा है।
स्थानीय निकायों को 4250 करोड़ मिलेंगे
16वें वित्तायोग की रिपोर्ट में स्थानीय निकायों यानि पंचायतों व शहरी निकायों को मिलने वाली ग्रांट में कमी हुई है। पांच वर्ष में कुल 4250 करोड़ की ग्रांट मिलेगी। इसमें से पंचायतों को 3700 करोड़ मिलेगा, जबकि शहरी निकायों को पांच वर्ष में 435 करोड़ रूपए की राशि मिलेगी।
आपदा प्रबंधन के लिए 2650 करोड़
आपदा प्रबंधन के लिए राज्य को अगले पांच वर्ष में कुल 2650 करोड़ रूपये की धनराशि मिलेगी। पहले यह राशि 3 हजार करोड़ थी। आपदा प्रबंधन कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि में भी कटौती हुई है।
हर महीने वेतन व पेंशन पर कितना खर्च
प्रदेश में 2300 करोड़ रुपये मासिक रूप से कर्मचारियों की पेंशन व वेतन के लिए निकालने पड़ते हैं। आरडीजी की राशि मिलने से इसमें काफी ज्यादा राहत मिलती थी। लेकिन अब सरकार के सामने वेतन व पेंशन की अदायगी के लिए मुश्किलें पेश आएंगी। ऋण भी केन्द्र सरकार सीमा में लेने की मंजूरी दे रही है। आरडीजी के बूते यहां पर कैश मेनेजमेंट चलता था जो बुरी तरह से प्रभावित होगा। 15वें वितायोग की रिपोर्ट के अनुसार हर महीने यहां 270 करोड़ की आरडीजी मिलती थी। जिससे भी काम नहीं चल पाता था और अब तो वो पूरी तरह से बंद हो जाएगी।
