हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारतीय समाज हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का अटूट संगम है। देश के अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल हमारी आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर भारतीय जनमानस की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर सदियों से देश की धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार 8 से 11 मई 2026 तक “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” मना रही है, जिसमें हरियाणा सरकार भी सहयोग कर रही है।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 1026 में हुए हमले के बाद भी सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारत की उस अजेय भावना का प्रतीक है, जिसने हर चुनौती के बावजूद अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने 13 नवंबर 1947 को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उनका यह आह्वान पूरे देश में सांस्कृतिक जागरण का कारण बना। हालांकि दुर्भाग्यवश मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद उसके उद्घाटन से पहले ही सरदार पटेल का निधन हो गया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देशभर के धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के तहत सोमनाथ, काशी, अयोध्या, केदारनाथ और उज्जैन जैसे तीर्थ स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है, जबकि उनकी पारंपरिक पहचान को भी सुरक्षित रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोमनाथ मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उनके प्रयासों से देश और विदेश में रहने वाले भारतीय अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से दोबारा जुड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सोमनाथ मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति और ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।
