चंडीगढ़। आम बजट में पंजाब को पूरी तरह नजरअंदाज करने की वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आपरेशन सिंदूर के बावजूद सीमावर्ती प्रांत को जिस तरह नजरअंदाज किया गया है, वह सही नहीं है।
सीमावर्ती जिलों ने पहले आपरेशन सिंदूर और बाद में बाढ़ को झेला। प्रदेश के लिए विशेष ग्रांट देने की मांग की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने विशेष ग्रांट देना तो दूर, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (एसडीआरएफ) के नियमों को ही और सख्त कर दिया है।
उन्होंने निर्मला सीतारमण के साथ प्री बजट मीटिंग में कहा था कि पंजाब से सटी पाकिस्तान की सीमा को मजबूत करने की दिशा में ध्यान देने की जरूरत है। जिस प्रकार पाक के साथ संघर्ष में इस इलाके का नुकसान हुआ है और बाढ़ में इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है, उसके लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
पिछले 12 वर्षों की तरह इस बार भी बजट में पंजाब का नाम तक नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान देश का पेट भरता है, फिर भी केंद्र सरकार उन व्यवस्थाओं में निवेश को लगातार अनदेखा कर रही है जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि केंद्रीय बजट एक बार फिर पंजाब की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के लिए एमएसपी की कोई गारंटी नहीं है, युवाओं के लिए रोजगार का कोई भरोसा नहीं है और उद्योगों या टैक्स प्रणाली को कोई राहत नहीं दी गई है।
केंद्र ने पंजाब की आर्थिकता को मज़बूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे राज्य और यहां के लोगों के साथ एक बार फिर नाइंसाफी हुई है। मान ने कहा कि पंजाबी मेहनती और जज्बे वाले हैं और केंद्र की बार-बार अनदेखी के बावजूद आप सरकार और पंजाब के लोग एकजुट होकर अपने दम पर पंजाब को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे।
वहीं, वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब देश की कृषि की रीढ़ है और देश की अन्न सुरक्षा में भी अहम योगदान देता है। इसके बावजूद बजट में यूरिया सब्सिडी में 10 हजार करोड़ की कमी कर दी गई है। जिस नई पेंशन योजना का पैसा म्युचुअल फंड में सरकार लगाती है, उसमें ट्रांजैक्शन टैक्स 0.2 से बढ़ाकर 0.5 कर दिया गया है। हमने जीएसटी 0.2 लागू होने के बाद राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई करने की मांग की थी।
पंजाब को इससे सालाना 6,000 करोड़ का नुकसान होगा। रक्षा के बारे में हमें उम्मीद थी कि केंद्रीय वित्त मंत्री भारत को रक्षा उत्पादन पर मजबूत बनाने और पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव के मद्देनजर रक्षा बजट को अर्थपूर्ण बढ़ाने के लिए बड़ी योजनाओं का ऐलान करेंगे। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री के भाषण में रक्षा का कुल जिक्र सिर्फ चार बार हुआ।
पूंजी निर्माण के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआइ) के बारे में चीमा ने कहा कि इस योजना का कोई जिक्र नहीं है। सभी राज्यों ने सीएपीईएक्स के उच्च स्तर को जारी रखने के लिए योजना के रूपरेखा को अर्थपूर्ण ढंग से विस्तार देने की मांग की थी।
स्वच्छ भारत मिशन का बजट पिछले साल 5,000 करोड़ से आधा होकर 2500 करोड़ घटकर आधा रह गया। मनरेगा के तहत वीबी-जी-रामजी बजट 88,000 करोड़ से बढ़कर 95,692 करोड़ रुपये हो गया है।
