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Home » Blog » कैग रिपोर्ट में खुलासा: कई सार्वजनिक उपक्रम घाटे में, सरकारी निधि की बर्बादी और गलतियां
राज्यहरियाणा

कैग रिपोर्ट में खुलासा: कई सार्वजनिक उपक्रम घाटे में, सरकारी निधि की बर्बादी और गलतियां

lokmatujala
Last updated: February 22, 2026 3:35 am
By lokmatujala
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7 Min Read
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चंडीगढ़। हरियाणा में कुल 37 सरकारी कंपनियों (सार्वजनिक उपक्रम) में से 11 कंपनियों को वित्त वर्ष 2022-23 में 51 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा। इस दौरान केवल 19 सार्वजनिक उपक्रमों ने लाभ दिखाया है, जबकि चार कंपनियों की संचित हानि के कारण उनकी पूरी पूंजी खत्म हो गई। कई उपक्रम लगातार घाटे के चक्र में फंसे हुए हुए हैं। कई कंपनियों में स्वतंत्र निदेशक तक नहीं थे।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। इस दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और उपक्रमों में अनियमितताओं के चलते सरकारी खजाने को 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। 2516 मामलों में 260 करोड़ रुपये का कर कम वसूला गया।

विभागों ने 79 करोड़ रुपये की गड़बड़ी स्वीकार की है। बिक्री कर व वैट के मामलों में बिना जरूरी दस्तावेज जांचे रियायत देने से दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 5.90 करोड़ रुपये का जुर्माना भी नहीं वसूला गया।

स्टांप शुल्क के मामलों में जमीन का गलत वर्गीकरण और कम मूल्यांकन करने से 23.37 करोड़ कम मिले। संयुक्त करारों का पंजीकरण नहीं कराने से भी 13.99 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

फरीदाबाद और करनाल में स्मार्ट सिटी मिशन में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। नगर स्तरीय निगरानी समिति की 133 बैठकें होनी चाहिए थीं, लेकिन हुईं सिर्फ दस। 167 में से 45 परियोजनाएं ही समय पर पूरी हो सकी हैं।

करनाल में 356.87 करोड़ रुपये ऐसे क्षेत्रों में खर्च किए गए, जो चयनित विकास क्षेत्र से बाहर थे। दोनों शहरों के लिए 3,897 करोड़ रुपये की व्यवस्था की योजना थी लेकिन केवल 1,8256 करोड़ (46.86 प्रतिशत) ही जुटाए जा सके। सरकार से मिलने वाले अनुदान के अलावा निजी भागीदारी, ऋण या जमीन से संसाधन जुटाने के प्रयास सफल नहीं रहे।

स्टांप शुल्क छूट का गलत फायदा

इसी तरह विभिन्न स्थानों पर खून के रिश्तों में संपत्ति हस्तांतरण पर मिलने वाली स्टांप शुल्क छूट का गलत फायदा उठाने का मामला सामने आया है। मई 2022 से मार्च 2023 के बीच नौ सब रजिस्ट्रार और संयुक्त सब रजिस्ट्रार कार्यालयों की जांच में पाया कि 2020-21 और 2021-22 के दौरान 14 ऐसे दस्तावेजों में भी छूट दे दी गई जिनमें संपत्ति खून के रिश्तों से बाहर के लोगों को दी गई थी।

इससे 61 लाख रुपये का नुकसान हुआ। 218 मामलों में जमीन की रजिस्ट्री करते समय कृषि भूमि की दर से स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस के तौर पर 28.69 करोड़ रुपये वसूले गए। बाद में जमीन के रिकार्ड की जांच में पता चला कि ये भूमि असल में रिहायशी, कारोबारी या औद्योगिक प्लाट थीं।

इन पर 46.51 करोड़ रुपये वसूले जाने चाहिए थे। इससे सरकार को 17.82 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कुछ मामलों में कीमती (प्राइम) जमीन को सामान्य कृषि भूमि मानकर कम दर से शुल्क लेने से 1.31 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क कम वसूला गया।

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड को सरकारी संस्था मानकर 1.36 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस से छूट दे दी गई।

114 किसानों ने जनवरी 2014 के बाद मिले मुआवजे की राशि से जमीन खरीदी और स्टांप शुल्क व पंजीकरण फीस में छूट ले ली। इससे 2.23 करोड़ रुपये कम मिले। सात बिल्डरों ने कानून के नियमों का पालन नहीं किया और संयुक्त समझौतों की रजिस्ट्री नहीं कराने से 13.99 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ।

यह अनियमितताएं भी आईं सामने

  • -हरियाणा आर्बिटल रेल कारपोरेशन लिमिटेड ने तय समय से अधिक अवधि तक शेयर आवेदन राशि अपने पास रखी जिससे 1.20 करोड़ रुपये का ब्याज देना पड़ा।
  • -हरियाणा पर्यटन निगम लिमिटेड ने एक कन्वेंशन सेंटर के समझौते में देरी की जिससे 0.68 करोड़ की लाइसेंस फीस का नुकसान हुआ है।
  • -वन विभाग ने भूमि के बदले वसूली जाने वाली सही राशि की मांग नहीं की जिससे 22.63 करोड़ रुपये कम मिले।
  • -शहरी विकास प्राधिकरण ने एक विस्थापित व्यक्ति को कम दर पर प्लाट दे दिया जिससे 1.97 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बाद में यह प्लाट एक गैर विस्थापित व्यक्ति को हस्तांतरित कर दिया गया।
  • -हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड को समय पर भुगतान नहीं करने के कारण कर्मचारी भविष्य निधि में देरी के चलते 8.29 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
  • -महिला एवं बाल विकास विभाग ने सुरक्षित भविष्य योजना के लाभार्थियों की सूची समय पर अपडेट नहीं की गई जिससे भारतीय जीवन बीमा निगम को अधिक प्रीमियम दे दिया गया। इससे करीब 12.66 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  • -लोक निर्माण विभाग ने चार परियोजनाएं वर्षों तक पूरी नहीं की, जिससे 25 करोड़ रुपये व्यर्थ खर्च हुए
  • -महिला एवं बाल विकास विभाग ने आधी-अधूरी तैयारी के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में खोले गए प्ले स्कूल के लिए ओडिशा की फर्म से चार हजार इलेक्ट्रिक अल्ट्रावायलेट वाटर प्यूरीफायर खरीद लिए। प्रत्येक की कीमत 4,871 रु. थी। इनमें से 1,489 ही चालू मिले। बाकी जगह कहीं बिजली कनेक्शन नहीं था तो कहीं फिटिंग नहीं थी। गारंटी के 3 वर्ष बीत गए।
  • -कुरुक्षेत्र में आइटीआइ के लिए 11.10 करोड़ रुपए तय हुए। जहां बननी थी, वहां जलभराव होता है। ठेकेदार ने मिट्टी का भराव कराने के लिए कहा, जो नहीं हुआ। ठेकेदार चार करोड़ रुपये से अधिक का काम कर चुका है।
  • -रेवाड़ी-नारनौल लाइन पर गोविंदपुर के पास आरयूबी के लिए 19.89 करोड़ का बजट तय हुआ। रेलवे को 11.84 करोड़ दिए, पर जमीन पर सहमति ही नहीं बनी।
  • -चीका मंडी जाने के लिए मारकंडा नदी पर पुल निर्माण पर 8.14 करोड़ खर्च हो गए, पर काम अधूरा है
  • -पानीपत में स्टेडियम पर 1.66 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है
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