शिमला। बैंकों से ऋण लेकर उसकी अदायगी न करने वाले शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों का विभाग ने रिकॉर्ड तलब किया है। शिक्षा विभाग ने पिछले 10 वर्षों (वर्ष 2015-16 से 2024-25) तक का रिकॉर्ड मांगा है। वित्त विभाग की ओर से शिक्षा सहित अन्य विभागों को एक पत्र भेजा गया है, जिसके आधार पर स्कूल शिक्षा निदेशालय ने यह कार्रवाई शुरू की है।
निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग, आशीष कोहली ने सभी उपनिदेशकों और स्कूल प्रधानाचार्यों को वित्त विभाग की ओर से जारी पत्र का हवाला देते हुए इस जानकारी को जल्द निदेशालय भेजने का निर्देश दिया है। इस पत्र में शिक्षक और गैर शिक्षक द्वारा लिए गए ऋण और अग्रिमों का पूरा लेखा-जोखा मांगा गया है।
निदेशालय ने परफार्मा भेजा
निदेशालय ने पत्र के साथ एक परफार्मा भी भेजा है, जिसमें सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इनमें कर्मचारी का नाम, ऋण का प्रकार (जैसे कार या शिक्षा कार्य के लिए ऋण), घर बनाने के लिए अग्रिम राशि, स्वीकृत राशि, अभी तक वसूली जा चुकी राशि, बकाया राशि, और क्या कर्मचारी इसकी अदायगी में डिफाल्टर है, शामिल हैं। यदि कोई डिफाल्टर है, तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई अमल में लाई गई है, इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
सरकारी कर्मचारियों को दिए गए अग्रिमों और ऋणों की वसूली में वर्षों से चली आ रही ढिलाई अब महंगी पड़ने वाली है। विभाग का कहना है कि यदि वसूली में लापरवाही सामने आई, तो न केवल डिफाल्टर कर्मचारियों बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। वित्त विभाग की ओर से आए पत्र के बाद विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि इसका पूरा रिकार्ड तैयार कर निदेशालय भेजा जाए। रिकार्ड आने के बाद विभाग इसे वित्त विभाग को भेजेगा।
वित्त विभाग के पत्र में क्या
वित्त विभाग ने उन कर्मचारियों की सूची भी तलब की है, जो ऋण की नियमित किस्तें नहीं चुका रहे और डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, वित्त विभाग की ओर से जो पत्र जारी हुआ है, उसमें कहा गया है कि ऋण वसूली केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। जिन अधिकारियों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) की निगरानी में वसूली होनी थी, यदि उनकी लापरवाही से सरकारी धन अटका है, तो उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वित्तीय नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
इसलिए सरकारी विभागों में हलचल तेज
अधिकांश विभागों का वेतन राज्य सहकारी बैंकों के माध्यम से जारी होता है। जब कर्मचारी ऋण लेते हैं, तो उनकी सैलरी स्लीप में यह जानकारी लगती है। संबंधित विभाग का डीडीओ इसे वेरिफाई करता है, और इसे विभाग की अंडरटेकिंग माना जाता है। विभाग के इस कदम से सरकारी विभागों में हलचल तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
